कई राज्यों में विपक्षी दलों ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिसके कारण इन सीटों पर चुनाव की जरूरत ही नहीं पड़ी और उम्मीदवार सीधे राज्यसभा पहुंच गए। इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग
हालांकि सभी सीटें निर्विरोध नहीं रहीं। अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा की कुल 11 सीटों पर मुकाबला होगा। इन सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा।
इनमें बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटें शामिल हैं। इन राज्यों में सीटों की संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए चुनाव कराना जरूरी हो गया है। राजनीतिक दलों को यहां क्रॉस वोटिंग की भी आशंका है, इसलिए सभी दल अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटे हुए हैं।
बिहार में नीतीश कुमार और नितिन नवीन के नाम चर्चा में
बिहार की राजनीति में इस चुनाव को खासा अहम माना जा रहा है। यहां से राज्यसभा जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
बिहार की पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें जेडीयू के रामनाथ ठाकुर, आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा, बीजेपी के शिवेश कुमार और आरजेडी के एडी सिंह भी शामिल हैं। विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए नीतीश कुमार और नितिन नवीन का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि पांचवीं सीट पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
37 सीटों के लिए करीब 40 उम्मीदवारों ने भरे थे पर्चे
दरअसल, 10 राज्यों में खाली हुई 37 राज्यसभा चुनाव सीटों के लिए करीब 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। कई राज्यों में उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण वहां चुनाव की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा में अतिरिक्त उम्मीदवार होने की वजह से मतदान कराया जाएगा। फिलहाल 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं।
असम में बीजेपी उम्मीदवार निर्विरोध
असम में भाजपा के जोगेन मोहन और तेरोस गोवाला के साथ ही यूपीपीएल समर्थित प्रमोद बोरो निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन तीनों नेताओं को बधाई देते हुए कहा कि वे राज्यसभा चुनाव में असम के लोगों के हितों और विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। कांग्रेस ने यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, जिसके कारण ये तीनों नेता बिना मुकाबले ही राज्यसभा पहुंच गए।
चुनावी मुकाबले को लेकर पार्टियां सतर्क
बिहार, ओडिशा और हरियाणा में होने वाले मुकाबले को देखते हुए राजनीतिक दल पूरी तरह सतर्क हैं। बीजेपी ने इन राज्यों में चुनाव की निगरानी के लिए वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया है।
इन चुनावों का परिणाम न सिर्फ राज्यसभा की संख्या संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक रणनीतियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग के बाद इन सीटों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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