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राहुल गांधी ने मां सोनिया की आत्मकथा पर व्यक्त किए भावनात्मक विचार

राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की आत्मकथा पर कहा कि उनके पिता राजीव गांधी गर्व से उन्हें देख रहे होंगे। सोनिया की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।

राहुल गांधी ने मां सोनिया की आत्मकथा पर व्यक्त किए भावनात्मक विचार
फोटो: राहुल गांधी ने मां सोनिया की आत्मकथा पर व्यक्त किए भावनात्मक विचार

सोनिया गांधी की आत्मकथा का विमोचन

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को अपनी मां सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर एक भावनात्मक पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता राजीव गांधी ऊपर से अपनी खूबसूरत पत्नी को गर्व से देख रहे होंगे। सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' इस वर्ष नवंबर में पाठकों के सामने आएगी। राहुल ने व्यक्त किया कि उन्हें गर्व है कि उनकी मां की कहानी उन करोड़ों लोगों तक पहुंचेगी, जो उन्हें पसंद करते हैं।


राहुल गांधी ने यह भी बताया कि सोनिया का ऐसा व्यक्तिगत जीवन जीना और अपनी कहानी को सार्वजनिक रूप से साझा करना कितना कठिन रहा होगा। आत्मकथा में वह भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार में विवाह, पति राजीव गांधी की हत्या के दुखद अनुभव और 2004 में प्रधानमंत्री पद अस्वीकार करने जैसे कई व्यक्तिगत घटनाओं का जिक्र करेंगी।


राहुल का व्यक्तिगत अनुभव

राहुल गांधी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'मां, मैंने आपको और पापा को आखिरी बार 35 साल से अधिक समय पहले साथ देखा था। जिस दिन पापा हमें छोड़कर गए, उस दिन से मैंने आपको जीवन की हर चुनौती का सामना असीम साहस और गरिमा के साथ करते देखा है।' उन्होंने कहा कि केवल प्रियंका और वह ही जानते हैं कि सोनिया ने किस प्रकार की परिस्थितियों का सामना किया है, खासकर उनके पति के निधन के बाद।


उन्होंने आगे कहा, 'मुझे खुशी है और गर्व है कि आपकी कहानी अब उन लाखों लोगों द्वारा पढ़ी जाएगी, जो आपसे प्यार करते हैं। मैं जानता हूं कि आप जैसी निजी जीवन को महत्व देने वाली शख्सियत के लिए अपनी कहानी को साझा करना कितना मुश्किल होता है।' राहुल ने यह भी कहा कि आज, उनके पिता राजीव गांधी के जन्मदिन पर, वह कल्पना कर सकते हैं कि 'पापा ऊपर से मुस्कुराते हुए अपनी खूबसूरत सोनिया को गर्व से देख रहे होंगे।'


राजीव गांधी का जीवन और सोनिया की कहानी

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह 40 वर्ष की आयु में 31 अक्टूबर 1984 को देश के प्रधानमंत्री बने और 2 दिसंबर 1989 तक इस पद पर रहे। उन्हें 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में हत्या कर दिया गया।


सोनिया गांधी की आत्मकथा की शुरुआत इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से होती है, जहां 1965 में 19 वर्षीय छात्रा सोनिया मायनो को एक खूबसूरत युवक से पहली नजर में प्यार हो जाता है। आत्मकथा में सोनिया ने अपने बचपन से लेकर भारत आने, प्रेम और विवाह तथा व्यक्तिगत दुखों तक की कहानी साझा की है। इस पुस्तक में 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नीत गठबंधन की जीत के बाद सोनिया का प्रधानमंत्री बनने से इनकार करने का भी उल्लेख है।


सोनिया की व्यक्तिगत यात्रा

सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन के बारे में सार्वजनिक मंचों पर बहुत कम बात की है। उनकी आत्मकथा में वह इटली में अपने बचपन से लेकर भारत आने, प्रेम और विवाह के अनुभवों के साथ-साथ उन गहरे व्यक्तिगत दुखों का जिक्र करती हैं, जिन्होंने न केवल उनके जीवन, बल्कि उनके अपनाए हुए देश का भविष्य भी प्रभावित किया।


इसमें यह भी बताया गया है कि सोनिया ने हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय व्यंजनों का आनंद लेने के अपने अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने अपनी सास इंदिरा गांधी से अपने परिचय का भी उल्लेख किया है।