वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन की गर्मी
हाल ही में वोट चोरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद इंडिया गठबंधन के साथ कई अन्य संगठन भी सड़कों पर उतर आए हैं। इनमें अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा प्रमुखता से शामिल हैं, जो पेपर लीक आंदोलन के बाद युवाओं की आवाज को उठाती आ रही हैं।
INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में नेहा बोरा अपने साथी छात्रों के साथ शामिल रहीं। बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ते हुए कई मौकों पर राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी और नेहा बोरा का हाथ थामे हुए मार्च करते दिखे। विपक्ष के प्रमुख नेताओं के लिए तैयार ट्रक पर भी उनकी उपस्थिति रही। इस संदर्भ में कन्हैया कुमार की अनुपस्थिति सवाल उठाती है, जो कभी युवा आंदोलनों के प्रतीक रहे हैं।
कन्हैया कुमार की बदलती भूमिका
कन्हैया कुमार बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च में तो शामिल थे, लेकिन वह कैमरों से दूर रहे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रभारी होने के नाते उनकी भूमिका में बदलाव आया है। उनके अनुसार, इस आंदोलन में एनएसयूआई की उपस्थिति अत्यधिक आवश्यक है।
कन्हैया कुमार की अनुपस्थिति के बावजूद एनएसयूआई ने इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष किया है। इस आंदोलन में उनकी भूमिका की तुलना में छात्र संगठन की सक्रियता अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छात्र संगठनों को मिल रहा समर्थन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चाहे पेपर लीक के खिलाफ हो या वोट चोरी के मुद्दे पर, नेहा बोरा ने इन सभी मुद्दों पर सशक्त रूप से लड़ाई जारी रखी है। राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के मार्च में छात्र संगठनों और नागरिक संगठनों के नेताओं को महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ नेताओं की नहीं, बल्कि सभी की है।
इस संदर्भ में, यह आवश्यक है कि समाज के सभी वर्ग मिलकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें। नेहा बोरा की सक्रियता और नेतृत्व ने उन्हें इस आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
इस बीच, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य 11 नेताओं ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। यह याचिका 10 पार्टियों के विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई है, जिसमें अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, और अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं। विपक्ष ने याचिका में 10 राहत की मांग की है, जो उनके अनुसार चुनाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
याचिका में मिली खामियां
याचिका में 14 छोटी खामियां पाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर याचिकाकर्ताओं को इन खामियों को दूर करने के लिए कहा गया है। प्रमुख खामियों में याचिका दाखिल करने की शुल्क का कम भुगतान शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में 220 रुपये का और शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है और इसे दूर करने के लिए 90 दिनों का समय दिया है। यह प्रक्रिया याचिका की वैधता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।





