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हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा टिकट कटने के बाद भविष्य पर उठे सवाल

हरदीप सिंह पुरी का मंत्री पद बनाए रखने की संभावनाएं बनी हुई हैं।

हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा टिकट कटने के बाद भविष्य पर उठे सवाल
फोटो: Questions Arise About Hardeep Singh Puri's Future After Rajya Sabha Ticket Cut

राज्यसभा के लिए भाजपा ने घोषित किए नए उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ नए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इस सूची में पार्टी ने अपने किसी भी मौजूदा राज्यसभा सदस्य को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। इसमें केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम शामिल है।


हरदीप सिंह पुरी का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इस बार भाजपा ने जिन आठ उम्मीदवारों का चयन किया है, उनमें पुरी का नाम नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि वह इन चुनावों के माध्यम से फिर से राज्यसभा नहीं जा रहे हैं।


हरदीप पुरी की मंत्री पद की संभावनाएं

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 6 अक्टूबर 2026 से हरदीप पुरी का सांसद का पद समाप्त नहीं होगा, और न ही इसी दिन उनका मंत्री पद समाप्त होगा। उनका वर्तमान कार्यकाल अपने निर्धारित समय तक जारी रहेगा, और यही वह स्थिति है, जो उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बनती है।


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मंत्री है लेकिन लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता है, तो उसे मंत्री पद छोड़ना होगा। इस तरह, मंत्री बनने के लिए पहले से सांसद होना आवश्यक नहीं है, लेकिन संसद में लौटने के लिए एक सीमित समय दिया गया है।


हरदीप पुरी के लिए संभावित विकल्प

हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होगा। यदि उस समय तक वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं, तब भी उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में बनाए रखा जा सकता है, क्योंकि अनुच्छेद 75(5) के तहत उन्हें सांसद बनने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा।


यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि संविधान में यह नहीं कहा गया है कि ऐसे मंत्री को पुनः राज्यसभा का सदस्य बनना आवश्यक है। मंत्री को केवल छह महीने की अवधि के भीतर संसद के किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा। यदि पार्टी उन्हें किसी अन्य राज्यसभा सीट या लोकसभा में भेजती है, तो वह मंत्री पद पर बने रह सकते हैं।


भविष्य की राजनीतिक स्थिति

संवैधानिक दृष्टि से हरदीप सिंह पुरी को किसी और राज्यसभा सीट से भेजना संभव है। उत्तर प्रदेश से नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी वापसी किसी अन्य राज्य से असंभव है। यह निर्णय पूरी तरह से राजनीतिक और संगठनात्मक होगा।


भाजपा ने अभी केवल उत्तर प्रदेश के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है, और पुरी को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस बीच, उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, जो संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल से भी जुड़ी हुई हैं।