चंडीगढ़: 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए हाईकमान ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाकर कमान किसी नए चेहरे को सौंपी जा सकती है। नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहा है।
अगले 48 घंटों में कांग्रेस आलाकमान इस संबंध में आधिकारिक फैसला ले सकता है।
महीनों से जारी गुटबाज़ी और नेतृत्व संघर्ष
पंजाब कांग्रेस में यह बदलाव अचानक नहीं हो रहा है, बल्कि पिछले कई महीनों से जारी अंदरूनी गुटबाज़ी और असंतोष का नतीजा है:
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वड़िंग बनाम चन्नी खेमा: प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच लगातार दूरियां और मतभेद देखने को मिले हैं। जुलाई में जब हाईकमान ने वड़िंग को पद पर बनाए रखने का फैसला लिया, तो चन्नी समर्थकों और वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की मांग तेज कर दी।
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भूपेश बघेल का जाना और सचिन पायलट की एंट्री: अंदरूनी विवाद को सुलझाने के लिए हाईकमान ने पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी बनाया था। हालांकि, असंतोष न थमने पर 5 सितंबर को बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया।
सचिन पायलट की रिपोर्ट और हाईकमान का मंथन
पंजाब का प्रभार संभालते ही सचिन पायलट ने मैराथन बैठकों का दौर शुरू किया। उन्होंने ज़िला स्तर के कार्यकर्ताओं, विधायकों और शीर्ष नेताओं (चन्नी, वड़िंग, बाजवा, रंधावा) से व्यक्तिगत फीडबैक लिया।
सूत्रों के मुताबिक, पायलट ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंप दी है, जिसके बाद अध्यक्ष बदलने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है।
प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल प्रमुख नाम:
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विजय इंदर सिंगला (सबसे मजबूत दावेदार)
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चरणजीत सिंह चन्नी
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प्रताप सिंह बाजवा
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सुखजिंदर सिंह रंधावा
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परगट सिंह
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गुरजीत सिंह औजला
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सुखबिंदर सिंह सरकारिया
सिंगला के नाम पर क्यों दांव लगा सकती है कांग्रेस?
विजय इंदर सिंगला को कमान सौंपने के पीछे कांग्रेस का बड़ा सामाजिक और रणनीतिक गणित छिपा हुआ है:
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हिंदू-गैर-जाट चेहरा: सिंगला गैर-जाट हिंदू पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्हें अध्यक्ष बनाने से कांग्रेस शहरी और हिंदू मतदाताओं को साध सकती है।
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सामूहिक नेतृत्व (Collective Leadership): सिंगला के अध्यक्ष बनने से 2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल जाट-सिख और दलित-सिख नेताओं (जैसे चन्नी, बाजवा, रंधावा) के लिए रास्ते खुले रहेंगे।
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बिना CM चेहरे के चुनाव लड़ना: कांग्रेस पंजाब में बिना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। ऐसे में एक संतुलित संगठनात्मक नेतृत्व गुटबाज़ी को दबाने में मददगार साबित होगा।
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
यदि अगले दो दिनों में राजा वड़िंग को हटाया जाता है, तो यह पिछले कुछ महीनों में पंजाब कांग्रेस में तीसरा सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव होगा। पहले प्रभारियों का बदलना और अब अध्यक्ष की विदाई यह दर्शाती है कि आलाकमान अब कोई ढील देने के मूड में नहीं है।
सचिन पायलट और कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 के चुनावों से पहले सभी गुटों को एकजुट कर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों के खिलाफ एक मजबूत, अनुशासित और प्रभावी संगठन खड़ा करने की होगी।





