प्रकाशन में गतिरोध का कारण
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन में किसी भी तरह का बाहरी दबाव नहीं था। प्रकाशक ने बताया कि चर्चा के दौरान 'एक विशेष मुद्दे' को लेकर गतिरोध उत्पन्न हुआ, लेकिन उस मुद्दे का खुलासा नहीं किया गया है। इसे समझौते और लेखक की गोपनीयता के कारण बताकर प्रकाशक ने मामले को संवेदनशील बताया।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। अमेरिका स्थित प्रकाशक 'अल्फ्रेड ए नॉफ' ने घोषणा की है कि यह पुस्तक 10 नवंबर को विश्व भर में प्रकाशित होगी। उल्लेखनीय है कि अल्फ्रेड ए नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है।
कांग्रेस की चिंताएं और आरोप
कांग्रेस पार्टी के कई नेता इस मुद्दे पर सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठा चुके हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस द्वारा दबाव डाला गया था, जिससे चीन द्वारा 'भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे' से संबंधित अंश हटा दिए गए।
प्रकाशक ने अपने ताजा बयान में स्पष्ट किया है कि आत्मकथा के प्रकाशन में किसी बाहरी हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं है।
प्रकाशक का स्पष्टीकरण
पीआरएचआई की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, 'हमारा मानना है कि 'बिलॉन्गिंग' के संबंध में कुछ गलत प्रस्तुतियों को स्पष्ट करना आवश्यक है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे।' प्रकाशक ने बताया कि पुस्तक की विषय-वस्तु गोपनीय है और उस पर प्रकाशन से पहले का प्रतिबंध है।
प्रकाशक ने कहा कि पांडुलिपि के संबंध में सामान्य संपादकीय प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें कई बिंदुओं पर विचार किया गया। हालांकि, कुछ मामलों में लेखक के प्रतिनिधियों के साथ सहमति नहीं बन सकी और अंततः लेखिका की टीम ने प्रकाशक को सूचित किया कि वह पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं।
गोपनीयता और संपादकीय निर्णय
प्रकाशक ने यह भी कहा कि वह लेखक की गोपनीयता को सर्वोपरि मानता है और इसलिए गतिरोध के कारणों का विवरण साझा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, 'किसी पांडुलिपि का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना, सवाल उठाना, सुझाव देना और स्वतंत्र संपादकीय निर्णय लेना हमारी जिम्मेदारी है।' पेंगुइन इंडिया ने पहले भी कहा था कि संपादकीय जांच, तथ्य-जांच और सुझाव उनकी सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।





