Molitics Logo
होम राष्ट्रीय योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर संकट? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बड़ा दावा
राष्ट्रीय

योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर संकट? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बड़ा दावा

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा पर संगठनात्मक अराजकता का आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा अब खुद अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष तय नहीं कर पा रही है।"

योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर संकट? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बड़ा दावा
फोटो: योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर संकट? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बड़ा दावा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बुधवार को मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है और अब जनता भी इस हकीकत को समझने लगी है। पवन खेड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन में भाजपा की संगठनात्मक स्थिति, चुनाव आयोग की भूमिका, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्थिति भी पार्टी के भीतर अस्थिर हो गई है।

योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर संकट-पवन खेड़ा


खेड़ा ने भाजपा पर संगठनात्मक अराजकता का आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा अब खुद अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष तय नहीं कर पा रही है। पार्टी नेतृत्वहीन हो गई है। ऐसा कोई चेहरा नहीं बचा जिसे सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाया जा सके।” उन्होंने आगे दावा किया कि योगी आदित्यनाथ की कुर्सी भी खतरे में है और पार्टी के भीतर उन्हें लेकर जबरदस्त मतभेद हैं।

पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जब हम चुनाव आयोग से सवाल करते हैं तो जवाब भाजपा देती है, और जब भाजपा से सवाल करते हैं तो जवाब आयोग से आता है।” उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि अब जनता इस ‘मोटा भाई और छोटा भाई’ की जोड़ी के खेल को समझने लगी है।

खेड़ा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हालिया इस्तीफे पर भी संदेह जताया। उन्होंने कहा, “जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला था, उसी समय उपराष्ट्रपति का इस्तीफा आया। यह संयोग नहीं हो सकता। उपराष्ट्रपति को देश के सामने अपनी वजह स्पष्ट करनी चाहिए।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कटाक्ष करते हुए खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चीन और अमेरिका जैसे देशों के सामने “नरम रुख” अपनाते हैं और कठिन सवालों से बचते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री विदेश दौरों के ज़रिए देश के मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं।”