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Owaisi का Amit Shah से हस्तक्षेप की मांग, राजस्थान विवाद भड़का

Owaisi ने Amit Shah से राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और बाड़मेर में धार्मिक स्थलों पर कथित तोड़फोड़ पर दखल की मांग की, इसे भेदभावपूर्ण कदम बताया।

Owaisi का Amit Shah से हस्तक्षेप की मांग, राजस्थान विवाद भड़का
फोटो: Owaisi Amit Shah, Religious Site Demolition
Owaisi-Amit Shah: AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और बाड़मेर जैसे इलाकों में मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक संरचनाओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें तोड़ा जा रहा है। Owaisi ने इस पूरी कार्रवाई को भेदभावपूर्ण और एकतरफा कदम बताया है।

Owaisi-Amit Shah: ओवैसी के आरोप और सोशल मीडिया पोस्ट 

Religious Site Demolition: Owaisi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि इन सीमावर्ती जिलों के कई क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है, जिससे स्थानीय मुस्लिम समुदाय में नाराज़गी और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं लगती, बल्कि एक विशेष समुदाय को लक्षित करती प्रतीत होती है।

 

250 साल पुरानी दरगाह का भी उल्लेख 

Owaisi ने अपने बयान में विशेष रूप से जैसलमेर जिले के रामगढ़-तानोट बाईपास रोड पर स्थित हज़रत महमूद शाह जिलानी की लगभग 250 साल पुरानी दरगाह का उल्लेख किया। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को भी इस कार्रवाई के तहत नुकसान पहुंचाया गया है, जिसे उन्होंने Rajasthan Demolition Row के तहत सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर पर गंभीर प्रहार बताया।

केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग

AIMIM नेता Owaisi ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को टैग करते हुए इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि इस तरह की कथित तोड़फोड़ को रोका जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। ओवैसी ने कहा कि अगर कोई अवैध निर्माण है भी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए, न कि किसी विशेष धर्म को निशाना बनाकर।

प्रशासन पर विरोधाभासी दावों के आरोप 

Owaisi ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में प्रशासन ने इन संरचनाओं को चरागाह भूमि (पशुओं के चरने के लिए आरक्षित सरकारी जमीन) पर बना बताया था। लेकिन जब स्थानीय लोगों ने जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश किए, तो बाद में यह कहा गया कि निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। Owaisi ने इसे प्रशासनिक असंगति और भेदभावपूर्ण रवैया बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के हवाले पर सवाल 

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का किसी भी ऐसी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला देकर धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। ओवैसी के अनुसार, यह तर्क वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका और प्रतिक्रिया का अभाव 

Owaisi ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों में डर और असंतोष का माहौल बन रहा है। Owaisi ने Amit Shah को टैग करते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और तुरंत रोक लगाए। फिलहाल राजस्थान सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वर्तमान स्थिति और राजनीतिक बहस 

यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर AIMIM इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष इसे नियमों के तहत अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया के रूप में देख रहा है। इस विवाद को लेकर आगे केंद्र और राज्य स्तर पर क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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