आइशी घोष की गिरफ्तारी: राज्यसभा में हंगामा
बुधवार को राज्यसभा में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब विपक्ष ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता आइशी घोष की गिरफ्तारी के प्रयास का मुद्दा उठाया। इस घटना के परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया, जिसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने भी उनका समर्थन किया।
जॉन ब्रिटास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'आज राज्यसभा में दिल्ली पुलिस द्वारा AKG भवन में घुसकर पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष और SFI नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कथित कोशिश का मुद्दा उठाया गया।'
विपक्ष का एकजुट विरोध
आइशी घोष की गिरफ्तारी: उन्होंने आगे कहा, 'सदन में इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की गई। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार का विरोध किया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूरे विपक्ष ने आइशी घोष के समर्थन में अपनी बात रखी। विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के चलते राज्यसभा के सभापति को कार्यवाही स्थगित करने के लिए बाध्य होना पड़ा।'
इस प्रकार, यह स्पष्ट हो गया कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और उन्हें सरकार के खिलाफ एकजुटता से खड़ा होना होगा।
आइशी घोष का परिचय
आइशी घोष एक प्रमुख छात्र नेता और वामपंथी कार्यकर्ता हैं। वह CPI(M) और उसके छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़ी हुई हैं। 2019 में, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्षता का चुनाव जीता।
छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में, आइशी घोष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों, जैसे कि फीस वृद्धि और हॉस्टल नियमों में बदलाव पर बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया। वर्तमान में, वह SFI के दिल्ली राज्य सचिवालय में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
AKG भवन में उत्पन्न विवाद
आइशी घोष की गिरफ्तारी: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को AKG भवन में आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की। वह हाल ही में सम्पन्न जंतर-मंतर आंदोलन की प्रमुख हस्तियों में से एक थीं।
SFI अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने कार्यालय में घुसकर आइशी घोष को हिरासत में लेने का प्रयास किया, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते उन्हें बिना गिरफ्तार किए लौटना पड़ा। SFI ने एक बयान में कहा, 'आइशी घोष उन छात्र नेताओं में से थीं जिनके नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। अब दिल्ली पुलिस उन्हें निशाना बना रही है।'
दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया
आइशी घोष की गिरफ्तारी: नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि 2021 के एक मामले में स्थानीय अदालत ने आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। उनका कहना है कि कई बार अदालत में पेश न होने के कारण यह वारंट जारी हुआ था और पुलिस केवल अदालत के आदेश का पालन कर रही थी। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है।
इस बीच, CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने दिल्ली पुलिस के कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वारंट की सूचना केवल फोन पर दी गई, जो कि अस्वीकार्य है। ब्रिटास ने आरोप लगाया कि छात्रों को डराने का प्रयास किया जा रहा है।
Read This Also:- महुआ मोइत्रा बयान: बागी सांसदों पर हमला, कहा 'बेशर्म गद्दार'





