दीपके और बोरा की गिरफ्तारी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके और वामपंथी छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए जाने के कारणों के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इस संदर्भ में, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों ने दीपके और बोरा की रिहाई के लिए दिल्ली पुलिस से अपील की है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में तिरंगा लहराना कब अपराध बन गया। उन्होंने कहा, "अगर हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहरा सकते, तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे?"
प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
16 अक्तूबर को अभिजीत दीपके ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' नामक प्रदर्शन का आह्वान किया था। दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके दो सहयोगियों को केवल इसलिए हिरासत में लिया क्योंकि वे तिरंगा फहरा रहे थे। प्रदर्शन की योजना के अनुसार, पुलिस ने दीपके और उनके समर्थकों को कनॉट प्लेस पहुंचने से पहले ही हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
जब अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया, तब AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने अपने कार्यकर्ताओं को मंडी हाउस पर इकट्ठा होने के लिए कहा। इसके बाद पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कनॉट प्लेस से CJP के कार्यकर्ताओं को भी हटा दिया।
विपक्ष का समर्थन
अरविंद केजरीवाल ने अभिजीत दीपके के समर्थन में आकर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के खिलाफ सवाल उठाते हुए इसे तानाशाही कहा। उन्होंने कहा, "यह सरासर तानाशाही है। अभिजीत की गिरफ्तारी दिखाती है कि मोदी जी उनसे कितने डरते हैं।"
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई अघोषित आपातकाल जैसी है। उन्होंने कहा, "आजाद भारत में हमारे युवाओं को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है।"
स्टालिन और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी अभिजीत दीपके और नेहा बोरा के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। उन्होंने पूछा, "उन्हें कहां रखा गया है? बिना बताए किसी को हिरासत में लेना गैर-कानूनी है।"
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने नेहा बोरा के मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पुलिस को इस मामले की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से मामले का संज्ञान लेने की अपील की।





