हाई कोर्ट का फैसला और पुलिस की आलोचना
मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) को पथ संचलन निकालने की अनुमति दी है। इस निर्णय के साथ ही न्यायालय ने राज्य पुलिस द्वारा पूर्व में दी गई अनुमति न देने की आलोचना की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने बार-बार उन आधारों पर रैली की अनुमति देने से मना किया है, जिन्हें पहले ही कोर्ट ने अवैध करार दिया था। इस आदेश के बाद RSS 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को पथ संचलन का आयोजन कर सकेगा।
आवेदन पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने RSS के राज्य सचिव वी. जी. जगदीशन की याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने थलपति विजय सरकार की पुलिस को निर्देश दिया है कि वे सोमवार तक आयोजकों के साथ मिलकर स्थान और समय निर्धारित करें। यह याचिका तब लगाई गई थी जब पुलिस ने दशहरा पर पथ संचलन की अनुमति नहीं दी थी। जगदीशन ने वरिष्ठ वकील एन.एल. राजा के माध्यम से पुलिस के आदेशों को चुनौती दी थी, जिसमें वार्षिक पथ संचलन और सार्वजनिक सभाएं आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
पुलिस के तर्कों पर अदालत का विवेचन
सुनवाई के दौरान जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, "तमिलनाडु पुलिस ने आवेदन खारिज करने के लिए कोई नया कारण प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने लगातार वही कारण दिए हैं, जिन्हें पहले ही बेबुनियाद ठहराया जा चुका है।"
रिपोर्टों के अनुसार, RSS ने पथ संचलन और सार्वजनिक सभाओं के लिए 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर की तारीखें प्रस्तावित की थीं, लेकिन पुलिस ने इन पर कुछ कारण बताते हुए अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित मार्गों पर दूसरे समुदायों के पूजा स्थल और तर्क में विश्वास रखने वाले नेताओं की मूर्तियों का होना जैसे तर्क दिए गए थे। इसके अलावा, ट्रैफिक जाम को भी एक कारण बताया गया।
संघ का लंबे समय से न्यायालय का दरवाजा खटखटाना
हाई कोर्ट ने कहा कि RSS ने 2022 से पथ संचलन के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने अपने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए बताया कि संघ को कानूनी सीमाओं के भीतर पथ संचलन निकालने का अधिकार है। न्यायालय ने 2023 में दी गई एक पूर्व आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक सड़कें सेकुलर स्थान होती हैं, जहां सभी की पहुंच होती है।
अदालत ने स्पष्ट किया, "यह एक ऐसा मामला है, जिसमें ऑपरेशन के लिए उपयोग होने वाले सर्जिकल उपकरण का इस्तेमाल मरीज को बचाने की बजाय उसकी जान लेने के लिए किया जा रहा है।" सुनवाई के दौरान, एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने बताया कि राज्य सरकार 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को पथ संचलन की अनुमति देने के लिए तैयार है, बशर्ते स्थानीय पुलिस द्वारा सुझाए गए बदलावों को मान लिया जाए।
पुलिस अधिकारियों को कोर्ट की फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें आवेदकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करनी चाहिए, न कि बहाने बनाने में। अदालत ने संघ से अपेक्षा की कि वे समय पर आवेदन प्रस्तुत करें। इसके साथ ही कोर्ट ने आशा व्यक्त की कि पथ संचलन से संबंधित विवादों में अब अदालत का समय व्यर्थ नहीं होगा।





