विपक्ष के प्रदर्शन पर निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया
दिल्ली में इंडिया गठबंधन द्वारा किए गए प्रदर्शन पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष के नेताओं, विशेष रूप से राहुल गांधी, पर कड़ा हमला किया। दुबे ने सवाल उठाया कि क्या 1947 से अब तक किसी ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर धरना-प्रदर्शन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जैसे नेता भारतीय संविधान को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान किया था।
दुबे ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को हटाने के लिए केवल दो तरीके हैं: एक तो चुनाव के जरिए और दूसरा अविश्वास प्रस्ताव लाकर। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाना आवश्यक होता है, न कि धरना देकर अपनी बात रखने का।
विपक्ष के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए
निशिकांत दुबे ने विपक्ष के नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विपक्ष पूरी तरह बिखर चुका है और अब अभिजीत दीपके जैसे लोग उसकी अगुवाई कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी इन नए नेताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसका परिणाम यह है कि उनका रवैया और अधिक आक्रामक हो गया है।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि राहुल गांधी में हिम्मत है, तो उन्हें पहले उन मुख्यमंत्रियों का इस्तीफा दिलवाना चाहिए, जो उनकी पार्टी के खिलाफ हैं। अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दुबे ने कहा कि उन्हें पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना चाहिए।
चुनाव आयोग पर विपक्ष का रवैया
निशिकांत दुबे ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर सब कुछ सही होता है, लेकिन हारने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी संसद के सदस्य हैं और उन्हें दूसरे सांसदों के समान अधिकार प्राप्त हैं।
दुबे की ये टिप्पणियाँ विपक्ष के प्रदर्शन मार्च के संदर्भ में आई हैं, जहां विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आपत्तियां उठाते हुए एकजुट हुए हैं।
विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च
विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भाग लिया।
इन नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है, जिसमें मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई है।





