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जेन-जी के बीच CJP पर नया सर्वे: चुनाव लड़ने पर क्या सोचते हैं युवा?

C-Voter के हालिया सर्वे में जेन-जी ने नौकरी को प्रमुख मुद्दा बताया है, जबकि 39 फीसदी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को चुनाव में नहीं उतारने की राय दी। सर्वे में युवाओं की विचारधारा और चुनावी समर्थन का आकलन किया गया है।

जेन-जी के बीच CJP पर नया सर्वे: चुनाव लड़ने पर क्या सोचते हैं युवा?
फोटो: जेन-जी के बीच CJP पर नया सर्वे: चुनाव लड़ने पर क्या सोचते हैं युवा?

CJP पर जेन-जी का रुख

हाल ही में C-Voter द्वारा किए गए एक सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जेन-जी के बीच क्या स्थान है, इसका आकलन किया गया है। यह सर्वे इंडिया टुडे और सी वोटर द्वारा किया गया था, जिसमें युवा मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। पिछले महीने दिल्ली में नीट पेपर लीक से संबंधित प्रदर्शन के बाद यह पहला बड़ा सर्वे है, जिसमें CJP के चुनाव लड़ने के विषय पर युवाओं के विचारों को जाना गया है।


सर्वे में पूछे गए सवालों के अनुसार, अधिकांश युवाओं ने वर्तमान समय में सबसे बड़ा मुद्दा नौकरी को बताया। 53 फीसदी जेन-जी ने इसे प्रमुख मुद्दा माना, जबकि 22 फीसदी ने शिक्षा को अपना प्राथमिक मुद्दा बताया। इसके अलावा, 12 फीसदी ने रहन-सहन के खर्च और 4 फीसदी ने मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताया।


CJP को चुनाव में उतरना चाहिए?

जब सर्वे में पूछा गया कि क्या CJP को चुनावी मैदान में उतरना चाहिए, तो 39 फीसदी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पार्टी को केवल दबाव बनाने वाले समूह के रूप में रहना चाहिए। वहीं, 26 फीसदी युवाओं ने समर्थन में कहा कि CJP को चुनाव में भाग लेना चाहिए और राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करना चाहिए।


सर्वे में शामिल युवाओं से यह भी पूछा गया कि अगर CJP चुनाव लड़ती है तो क्या वे वोट देंगे। इस पर केवल 33 फीसदी ने हां कहा, जबकि 43 फीसदी का मानना था कि वे CJP को वोट नहीं देंगे। इससे स्पष्ट होता है कि युवाओं में CJP को लेकर दिलचस्पी है, लेकिन चुनावी समर्थन हासिल करने में पार्टी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


रोजगार के मुद्दे पर युवाओं की राय

सर्वे के एक अन्य प्रश्न में जब युवाओं से पूछा गया कि रोजगार के अवसर पैदा करने की जिम्मेदारी किसकी है, तो 63 फीसदी ने इसका उत्तर दिया कि यह केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। इसके विपरीत, 14 फीसदी ने स्कूल और कॉलेजों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि 9 फीसदी ने निजी नियोक्ताओं और 5 फीसदी ने सामान्य लोगों और परिवारों को इस दिशा में उत्तरदायी माना।


यह सर्वे युवाओं की सोच और उनकी प्राथमिकताओं को समझने में मददगार साबित होता है, जो आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।