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नई दिल्ली: भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील पर समझौता

भारत-रूस संबंधों को मजबूती देने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता, जिसमें भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील पर समझौता भी शामिल है और आर्थिक सहयोग बढ़ाया जाएगा।

नई दिल्ली: भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील पर समझौता
फोटो: India Russia oil deal, Strait of Hormuz tension
नई दिल्ली में रूस के उप प्रधानमंत्री मांतुरोव के दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई अहम समझौते होने जा रहे हैं, जिसमें भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील भी शामिल है। मांतुरोव गुरुवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे और उनका दौरा रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर केंद्रित है। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करना बताया जा रहा है, विशेषकर सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में।

भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील

मांतुरोव अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ बैठक करेंगे और कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिसमें भारत-रूस के बीच बड़ी तेल डील पर समझौता भी शामिल है। इसके अलावा वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य फोकस रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा।

पृष्ठभूमि: वैश्विक परिदृश्य और रणनीति

इस दौरे से पहले, 30 मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिस्री और रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के बीच नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

पश्चिमी देशों, विशेषकर ब्रिटेन और अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात को लेकर चिंतित हैं। वहां उनके कई जहाज फंसे हुए हैं और ईरान की गतिविधियों ने तनाव बढ़ा दिया है। ऐसे समय में भारत और रूस के बीच मजबूत सहयोग की दिशा में उठाया गया कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आर्थिक सहयोग और पिछले फैसलों की समीक्षा

दोनों देशों ने पिछले साल दिसंबर में नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा भी की। उस शिखर सम्मेलन में आर्थिक सहयोग बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

अमेरिकी प्रयास विफल 

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और रूस के बीच संबंधों में दरार डालने की कोशिश की थी। उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। उनका उद्देश्य भारत को रूसी ऊर्जा क्षेत्र से दूर करना और यूक्रेन संकट के समाधान में अमेरिकी नीति को सशक्त बनाना था। हालांकि, यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।

इस दौरे के माध्यम से भारत और रूस अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जो दोनों देशों के हितों के लिए अहम माना जा रहा है।
 
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