हिंसा और बड़े हादसे का वर्णन
Ladakh protest बुधवार को Leh शहर में राज्यhood और संवैधानिक सुरक्षा की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण शुरुआत से हिंसक मोड़ पर आ गया। सुबह भूख हड़ताल कर रहे लोगों ने Sixth Schedule में शामिल होने और स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की माँग की थी। लेकिन दो fasting प्रदर्शनकारियों की तबियत बिगड़ने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ा। पुलिस से झड़प हुई, भीड़ ने भाजपा कार्यालय और एक पुलिस वैन को आग लगाई। इस संघर्ष में चार लोग मारे गए और कई घायल हुए।
स्थानीय प्रशासन ने Leh व Kargil जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया। सार्वजनिक सभाएँ और रैलियाँ बैन कर दी गईं। सुरक्षा बलों को आंसू गैस और लाठीचार्ज के साथ फायरिंग तक करनी पड़ी। नागरिकों का कहना है कि अचानक हिंसा भड़क गई जो पहले शांतिपूर्ण थी।
BJP का आरोप: Ladakh protest को कांग्रेस की साजिश कैसे बताया जा रहा है
हिंदुत्व दल BJP का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ युवा (Gen Z) का नारा भर नहीं है, बल्कि कांग्रेस सक्रिय भूमिका निभा रही है। BJP नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस के काउंसलर Phuntsog Stanzin Tsepag ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया और हिंसा को बढ़ावा दिया।
BJP ने यह दावा किया कि Congress कांग्रेस ने कुछ युवा नेताओं के ज़रिए Ladakh protest को राजनीतिक रंग दे दिया है, ताकि सरकार की नीतियों पर दबाव बनाया जा सके। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस की योजनाबद्ध भूमिका है, न कि सिर्फ आक्रोशित जनता की spontaneous प्रतिक्रिया।
सरकार के एक बयान में यह भी कहा गया कि मुद्दों पर बातचीत तो हो रही थी, लेकिन कुछ “politically motivated individuals” इस प्रक्रिया को बाधित करना चाहते थे। BJP का आरोप है कि ऐसी साजिशों से आंदोलन की शांत आत्मा खराब हुई।
विरोधी तर्क: आंदोलनकारियों और Sonam Wangchuk की Response
इस आरोप के विरोध में आंदोलन से जुड़े लोग कहते हैं कि Ladakh protest राजनीतिक दलों की बुनियादी साजिश नहीं है, बल्कि वर्षों से रखे गए वादों के न पूरे होने और स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी जैसा बड़ा मुद्दा है।
Sonam Wangchuk ने स्पष्ट किया कि आंदोलन “apolitical grassroots uprising” है। उनका कहना है कि अनेक युवाओं की शिकायतें लंबित थीं—राज्यhood की मांग, Sixth Schedule में शामिल करना, नौकरी के मामलों में पारदर्शिता आदि। उनमें से कई शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की बात कर रहे थे।
वांगचुक ने BJP द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया कि कांग्रेस ने व्यापक प्रभाव के साथ इस आंदोलन को नियंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास इतनी पहुँच नहीं कि वो हजारों युवाओं को सड़क पर उतार सके।





