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कर्नाटक में वाल्मीकि घोटाले पर मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा: सुसाइड नोट ने खोली पोल

कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि स्कैम के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में 89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की।

कर्नाटक में वाल्मीकि घोटाले पर मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा: सुसाइड नोट ने खोली पोल
फोटो: कर्नाटक में वाल्मीकि घोटाले पर मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा: सुसाइड नोट ने खोली पोल

कर्नाटक की राजनीति में उथल-पुथल

कर्नाटक की राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक नया मोड़ आया है। डीके शिवकुमार की सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। विपक्ष के लगातार दबाव के चलते उन्होंने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। आरोप है कि नागेंद्र ने 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' में लगभग 89 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने अपनी आंखों में आंसू लिए हुए कहा कि वह इन आरोपों से पूरी तरह निर्दोष हैं और ये आरोप निराधार हैं।


वाल्मीकि घोटाले की जटिलता

वाल्मीकि घोटाले ने हाल के समय में काफी सुर्खियां बटोरी हैं। आरोप है कि कर्नाटक सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए स्थापित निगम के कुल फंड (187 करोड़ रुपये) में से 89.63 करोड़ रुपये का हेरफेर हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन पैसों को अवैध तरीके से विभिन्न खातों में भेजा गया। इसके लिए सैंकड़ों सैल कंपनियों और फर्जी खातों का उपयोग किया गया है, जिसमें मंत्री बी. नागेंद्र का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।


सुसाइड नोट से खुला सच

यह मामला तब और जटिल हो गया जब निगम के अकाउंट्स का काम देखने वाले 52 वर्षीय चंद्रशेखरन पी. ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में इस घोटाले का विस्तार से जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे शीर्ष प्रबंधन और अन्य अधिकारियों ने उन पर बिना किसी मंजूरी के पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डाला। जांच में पता चला कि निगम के आधिकारिक खाते से करीब 88.62 करोड़ रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए थे, जिनसे नकदी निकाली गई थी।


जांच एजेंसियों की कार्रवाई

राज्य सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है। दोनों एजेंसियों ने बी. नागेंद्र को इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना है। इसके चलते विपक्ष ने उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा दिया।


राजनीतिक माहौल में उथल-पुथल

ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि नागेंद्र ने अपने प्रभाव का उपयोग कर कॉर्पोरेशन के बैंक अकाउंट को गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में से 20 करोड़ रुपये का इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक कैंपेन के लिए किया गया। विपक्षी दलों ने इस मामले में नागेंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा और जेडीएस ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।


मुख्यमंत्री का दबाव

इस मामले का प्रत्यक्ष दबाव मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर भी आ रहा था। उन्होंने पहले ही संकेत दिए थे कि नागेंद्र जल्द ही इस संदर्भ में बड़ा निर्णय लेंगे। हालांकि, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने नागेंद्र का बचाव करते हुए कहा कि इस्तीफे की मांग का कोई आधार नहीं है। उनका कहना था कि जिस रकम को डायवर्ट किया गया था, उसका बड़ा हिस्सा वापस आ चुका है।