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8 जनवरी को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर होगी JPC की बैठक, विपक्ष ने किया था प्रस्ताव का विरोध

लोकसभा में पेश किए गए "एक राष्ट्र, एक चुनाव" विधेयक में पूरे भारत में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है।

8 जनवरी को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर होगी JPC की बैठक, विपक्ष ने किया था प्रस्ताव का विरोध
फोटो: 8 जनवरी को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर होगी JPC की बैठक, विपक्ष ने किया था प्रस्ताव का विरोध
देश में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" के विचार पर चर्चा और समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक अगले वर्ष 8 जनवरी को होगी। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को इस पहल की जटिलता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे लागू करना "आसान काम नहीं" है। उन्होंने बताया कि समिति की बैठक में सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

विपक्ष का विरोध 

वामपंथी दलों सहित विपक्ष ने सरकार के "एक राष्ट्र, एक चुनाव" प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक जैसे दलों ने इसे देश के संघीय ढांचे और राज्य विधानसभाओं के अधिकारों पर "सीधा हमला" बताया है। वामपंथी नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में बैठक कर एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "संविधान में प्रस्तावित संशोधन संघीय ढांचे, राज्य विधानसभाओं और उन्हें चुनने वाले मतदाताओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। यह केंद्रीकरण को बढ़ावा देने वाला कदम है। विधानसभाओं के पांच साल के कार्यकाल को मनमाने ढंग से कम करना जनादेश के साथ अन्याय होगा।"

विधेयक और संयुक्त संसदीय समिति का गठन 

लोकसभा में पेश किए गए "एक राष्ट्र, एक चुनाव" विधेयक में पूरे भारत में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है। इस विधेयक पर गहन विचार-विमर्श के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। इस 31 सदस्यीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। लोकसभा सदस्यों में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और मनीष तिवारी, एनसीपी की सुप्रिया सुले, टीएमसी के कल्याण बनर्जी और भाजपा के पीपी चौधरी, बांसुरी स्वराज और अनुराग सिंह ठाकुर शामिल हैं।

विपक्ष की आशंका विपक्षी नेताओं ने इस विधेयक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि प्रस्तावित बदलावों से सत्ताधारी दल को राज्यों में चुनाव प्रक्रिया पर अनुचित प्रभाव मिल सकता है। इसके अलावा, इससे क्षेत्रीय दलों की स्वायत्तता भी कमजोर हो सकती है। सलमान खुर्शीद ने कहा, "संसदीय समिति जब बैठक करेगी, तब सभी मुद्दों को सामने रखकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह प्रक्रिया आसान नहीं है, और हमें इसे हर पहलू से देखना होगा।"

क्या है "एक राष्ट्र, एक चुनाव" का उद्देश्य? 

सरकार का मानना है कि इस कदम से देश में चुनावी खर्चों में कमी आएगी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह विचार भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में व्यावहारिक नहीं है। जेपीसी की आगामी बैठक में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर पक्ष और विपक्ष के विचार आमने-सामने होंगे। इससे यह तय होगा कि "एक राष्ट्र, एक चुनाव" का रास्ता कितना आसान या जटिल होगा।