Molitics Logo
होम राष्ट्रीय जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान, ड्रेस कोड से सियासत तेज
राष्ट्रीय

जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान, ड्रेस कोड से सियासत तेज

संसद के बजट सत्र के बीच जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान आया, जिसमें उन्होंने संसद में सांसदों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की मांग उठाई है। उनके इस बयान के |

जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान, ड्रेस कोड से सियासत तेज
फोटो: Parliament dress code controversy, Jaiveer Shergill Rahul Gandhi statement
संसद के बजट सत्र के बीच जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान आया, जिसमें उन्होंने संसद में सांसदों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की मांग उठाई है। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।

सोशल मीडिया पर जयवीर शेरगिल ने राहुल गांधी पर बयान साझा किया, और कहा कि संसद देश के लोकतंत्र का मंदिर है, इसलिए यहां परिधान को लेकर कुछ मर्यादाएं तय होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि टी-शर्ट, खुली शर्ट और कार्गो पैंट जैसे कपड़ों को संसद परिसर में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि जैसे वकीलों और डॉक्टरों के लिए पेशे के अनुरूप ड्रेस कोड होता है, वैसे ही सांसदों के लिए भी एक मानक तय होना चाहिए।

जयवीर शेरगिल का राहुल गांधी पर बयान

हालांकि शेरगिल ने अपने बयान में सीधे तौर पर राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह संसद ड्रेस कोड विवाद कांग्रेस नेता के पहनावे से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी कई मौकों पर संसद में टी-शर्ट और कार्गो पैंट में नजर आ चुके हैं।

बाद में शेरगिल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन कांग्रेस की प्रतिक्रिया से ऐसा लगता है कि “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत सच साबित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे कपड़ों पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी सांसद अनुचित पहनावे में न आए।

कांग्रेस का पलटवार 

शेरगिल के इस बयान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे अनावश्यक मुद्दा बताते हुए कहा कि यह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। 

कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने इस पर निराशा जताते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर इस तरह की बहस छेड़ना संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में यह भी तय किया जा सकता है कि सांसद कौन से रंग के कपड़े पहनें।

गरिमा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता 

यह पूरा विवाद अब संसद की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस में बदल गया है। एक ओर बीजेपी नेता इसे संस्थान की प्रतिष्ठा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे व्यक्तिगत पसंद और अभिव्यक्ति की आज़ादी का मुद्दा बता रहा है। 

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस आगे किसी ठोस प्रस्ताव या नियम में बदलती है या फिर केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाती है।