नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Alliance) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद, मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियों, निष्पक्ष चुनाव (Fair Elections) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन किया। "चलो दिल्ली – मार्च फॉर डेमोक्रेसी" के नाम से आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामपंथी दलों, छात्र संगठनों (AISA, SFI, NSUI) और कई सामाजिक व नागरिक संगठनों के हजारों प्रतिनिधि व कार्यकर्ता एक साथ सड़कों पर उतरे।
1. संविधान क्लब में 'चाय पे चर्चा' और रणनीतिक शुरुआत
सोमवार की सुबह नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (Constitution Club of India) में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं, सांसदों और सहयोगी दलों के समन्वयकों की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस 'चाय पे चर्चा' के दौरान विरोध प्रदर्शन के स्वरूप, सुप्रीम कोर्ट तक निकाले जाने वाले मार्च की पूरी रणनीति और पुलिस बैरिकेडिंग से निपटने की कार्ययोजना तैयार की गई।
बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है, बल्कि देश के संविधान, नागरिक अधिकारों और 'एक व्यक्ति, एक वोट' (One Man, One Vote) के मूल लोकतांत्रिक सिद्धांत की रक्षा करने की सामूहिक और ऐतिहासिक लड़ाई है।
2. मार्च की शुरुआत और प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
संविधान क्लब से बाहर निकलते ही विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कारवां बसों और पैदल मार्च के जरिए 12 खंभा रोड और कनॉट प्लेस (CP) चौराहे की ओर अग्रसर हुआ। बसों और जुलूस के साथ हजारों की संख्या में लहराते राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) और संविधान की प्रतियां लिए हुए कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम मौजूद था।
मार्च में शामिल प्रमुख राष्ट्रीय चेहरे:
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष: राहुल गांधी
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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष: मल्लिकार्जुन खड़गे
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प्रमुख नेता: प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल, तेजस्वी यादव (RJD), धर्मेंद्र यादव (SP), संजय राउत (Shiv Sena-UBT), महुआ मोइत्रा व सौगत राय (TMC), सुप्रिया सुले (NCP-SCP), शशि थरूर, सचिन पायलट, जिग्नेश मेवानी।
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वामपंथी व छात्र नेता: दीपांकर भट्टाचार्य (CPI-ML), एम.ए. बेबी (CPI-M), आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा, एसएफआई नेता आइशी घोष और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव।
3. सीजेआई (CJI) से मुलाकात की कोशिश और कानूनी कदम
विपक्षी गठबंधन और नागरिक समाज के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ और एसआईआर प्रक्रिया में कथित अवैधताओं को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर विस्तृत हलफनामा व ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, न्यायपालिका की तटस्थता और मामले के विचाराधीन (Sub Judice) होने के कारण व्यक्तिगत मुलाकात की मांग को औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सका, जिसके बाद लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट की ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी आधिकारिक याचिका दर्ज कराई।
4. पुलिस की कड़ी नाकेबंदी, धारा 163 और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मार्च को नियंत्रित करने और रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के भारी जवानों को तैनात किया गया था। मध्य दिल्ली क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई थी।
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3-लेयर बैरिकेडिंग: 12 खंभा रोड, मंडी हाउस, और सुप्रीम कोर्ट जाने वाले तमाम मार्गों पर लोहे के मजबूत बैरिकेड्स और वाटर कैनन तैनात थीं।
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डिटेंशन बसों की तैनाती: प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए जगह-जगह बसें खड़ी की गई थीं।
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जंतर-मंतर डी-नोटिफिकेशन विवाद: विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि पारंपरिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
5. देश भर से पहुंचे युवाओं, छात्रों और कार्यकर्ताओं का जनसैलाब
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश (रामपुर, हापुड़), बिहार, हरियाणा (हांसी), छत्तीसगढ़ (रायपुर), राजस्थान और हैदराबाद से हजारों युवा, किसान और छात्र पहुंचे थे।
जमीनी स्तर पर वक्ताओं और युवाओं ने अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं:
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कनॉट प्लेस (CP) का माहौल: पिछले दिनों छात्रों व पत्रकारों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के बाद, इस विशाल जनसैलाब ने पुलिस और प्रशासन के सुरक्षा घेरे को पूरी तरह चुनौती दी।
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युवाओं व वकीलों की राय: डीयू, जेएनयू, जामिया और एएमयू के छात्रों तथा वकीलों ने दो टूक कहा कि जब तक मतदाता सूचियों में निष्पक्षता नहीं आती और चुनाव आयोग पूरी तरह जवाबदेह नहीं बनता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
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