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रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अगुवाई में IGoM की अहम बैठक आज

खाड़ी संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा, आज Rajnath Singh की बैठक में IGoM इस पर अहम फैसले लेगी, देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा होगी।

रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अगुवाई में IGoM की अहम बैठक आज
फोटो: Middle East crisis, Rajnath Singh meeting
Rajnath Singh meeting: पश्चिम एशिया में लगातार जारी तनाव और खाड़ी क्षेत्र में संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और गैस की कमी के चलते आम जनता को संघर्ष करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है, और इसी पर चर्चा के लिए आज राजनाथ सिंह की बैठक बुलाई गई है।

पीएम मोदी की अपील: तेल, गैस और सोने पर नियंत्रण 

PM Modi appeal: पीएम मोदी ने हाल ही में देश के लोगों से वर्क-फ्रॉम-होम अपनाने, कम तेल और गैस का इस्तेमाल करने, विदेश यात्राओं को सीमित करने और सोने की खरीद पर रोक लगाने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा संकट के मद्देनजर इन कदमों से न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राहत मिल सकती है। उन्होंने परिवारों से विशेष रूप से सोने की खरीद पर संयम बरतने को कहा, क्योंकि सोने के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

पीएम ने अपनी अपील में कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क-फ्रॉम-होम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को फिर से अपनाने का सुझाव भी दिया, ताकि तेल और अन्य संसाधनों की बचत की जा सके।

IGoM की बैठक: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई 

Rajnath Singh meeting: प्रधानमंत्री की अपील के एक दिन बाद दिल्ली में IGoM (Informal Empowered Group of Ministers) की अहम बैठक बुलाई गई है। यह बैठक आज सुबह साढ़े 10 बजे आयोजित होगी और इसकी अगुवाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। बैठक में मध्य पूर्व में बने संकटपूर्ण हालात पर चर्चा होगी और सभी संबंधित मंत्रालयों के सचिव तथा मंत्रियों को वर्तमान स्थिति की जानकारी दी जाएगी, और इसी पर निर्णय लेने के लिए राजनाथ सिंह की बैठक आयोजित की जा रही है।

बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल मौजूदा संकट का मूल्यांकन करना है, बल्कि संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार करना है। सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा और रक्षा मंत्रालय के अलावा वित्त, विदेश और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय भी इस बैठक में शामिल होंगे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: संसद में विशेष सत्र की मांग


 


Rajnath Singh meeting: कांग्रेस ने भी इस मसले को गंभीरता से लिया है। पार्टी के नेता और सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा करते हुए सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि पीएमओ की ओर से जारी अपीलें गंभीर संकेत देती हैं, और इसके पीछे की वास्तविक वजह जनता को बताई जानी चाहिए, और इस पर चर्चा के लिए आज राजनाथ सिंह की बैठक आयोजित की जाएगी।

कार्ति ने लिखा कि सरकार को देशवासियों को मौजूदा हालात की वास्तविकता से अवगत कराना चाहिए। उनका सुझाव है कि केवल अपीलें जारी करने के बजाय संसद में चर्चा करके जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिदृश्य 

West Asia tension: खाड़ी संकट की वजह से वैश्विक तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधे असर डाल रहा है। बढ़ती कीमतों के चलते पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार में दबाव बढ़ेगा। यही नहीं, सोने के बढ़ते आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार ने चेतावनी दी है कि इस समय संयम बरतना और संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्क-फ्रॉम-होम और डिजिटल मीटिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनाने से न केवल ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि आर्थिक दबाव को भी कम किया जा सकेगा।

समाज और जनता पर असर

देश के नागरिक अब इन अपीलों के अनुरूप कदम उठाने के लिए तैयार हैं। कई लोग वर्क-फ्रॉम-होम को अपनाने लगे हैं, जबकि यात्रा और तेल के इस्तेमाल में कटौती की जा रही है। सोने की खरीद पर संयम रखने की अपील भी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट भारत के लिए केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और सामाजिक जिम्मेदारी का मुद्दा भी है। ऐसे में सरकार और जनता दोनों को मिलकर संतुलित और सतर्क कदम उठाने की आवश्यकता है।

खाड़ी संकट ने वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री की अपील और IGoM की बैठक इस संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वहीं, कांग्रेस की संसद में विशेष सत्र बुलाने की मांग यह संकेत देती है कि राजनीतिक विमर्श और पारदर्शिता भी समय की मांग है। संकट की गंभीरता को देखते हुए अब यह तय करना है कि सरकार और जनता मिलकर इस चुनौती का सामना किस प्रकार करेंगे।

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