राजनीति से संन्यास का संकेत
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल के बीच हुमायूं कबीर, जो आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और नाओदा के विधायक हैं, ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं। बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले कबीर ने रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की जीत का दावा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए रेजीनगर में चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं बताया।
कुछ दिन पहले ही कबीर को रेजीनगर में मतदान के दौरान पुलिस के साथ झड़प के बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें लगभग 12 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रति अपनी असहमति जताते हुए कहा कि जब तक वह पद पर हैं, वह विधानसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने नाओदा की जनता से अपने इस निर्णय के लिए माफी भी मांगी।
भावुक बयान और चुनावी स्थिति
कबीर ने पत्रकारों के सामने भावुक होते हुए कहा, ''अगर शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने रहते हैं तो मैं विधानसभा नहीं जाऊंगा। मैं नाओदा की जनता से माफी मांगूंगा।'' उन्होंने राजनीति से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के संकेत भी दिए और कहा कि वह राजनीतिक व्यवस्था से निराश हैं।
कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद एजेयूपी के उम्मीदवार के तौर पर रेजीनगर में चुनाव लड़ रहे हैं। यह विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल है, और कबीर के इस बयान से उपचुनाव में नई हलचल पैदा हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कबीर ने नाओदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी।
भाजपा की जीत का दावा
कबीर ने रेजीनगर में चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि वहां के प्रशासन ने निष्पक्ष चुनाव में बाधा डाली। उन्होंने कहा, ''रेजीनगर में भाजपा जीतेगी।'' यह टिप्पणियाँ उस समय आई हैं जब रेजीनगर और नंदीग्राम में हुए उपचुनाव को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों उपचुनावों के लिए मतों की गिनती नौ अक्टूबर को होगी, और कबीर के बयान ने चुनावी परिदृश्य को और भी दिलचस्प बना दिया है।





