Molitics Logo
होम राष्ट्रीय गुजरात यूसीसी विधेयक 2026: शादी-तलाक और लिव-इन पर सख्त नियम
राष्ट्रीय

गुजरात यूसीसी विधेयक 2026: शादी-तलाक और लिव-इन पर सख्त नियम

7 घंटे की बहस के बाद गुजरात यूसीसी विधेयक 2026 पास, जबरन या धोखाधड़ी से शादी पर 7 साल की सजा, शादी और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य अब |

गुजरात यूसीसी विधेयक 2026: शादी-तलाक और लिव-इन पर सख्त नियम
फोटो: Gujarat UCC Bill 2026, Uniform Civil Code Gujarat
गुजरात विधानसभा में लंबी बहस के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, जिसे गुजरात यूसीसी विधेयक 2026 कहा जा रहा है, को मंजूरी मिल गई है। लगभग 7 घंटे चली चर्चा के बाद ध्वनि मत से पारित इस बिल को राज्य सरकार ने बड़ा सुधार बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

गुजरात यूसीसी विधेयक 2026 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस विधेयक, यानी गुजरात यूसीसी विधेयक 2026 को पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसके तहत शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों की बजाय एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी।

शादी और लिव-इन पर नए नियम

नए कानून के अनुसार, गुजरात में समान नागरिक संहिता के तहत अब विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। शादी के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर जुर्माना या जेल का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाते हुए उसका पंजीकरण जरूरी किया गया है, ताकि खासकर महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिल सके।

बिल में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई शादी जबरन, दबाव या धोखाधड़ी से कराई जाती है तो दोषी को 7 साल तक की जेल हो सकती है। बहुविवाह पर भी इसी तरह की सख्ती लागू की गई है।

गुजरात बना दूसरा राज्य

इस कानून के लागू होने के साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में इस दिशा में पहला कदम उठाया था।

किन पर नहीं होगा लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून अनुसूचित जनजातियों (ST) और उन समुदायों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं। साथ ही यह कानून राज्य के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू होगा।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे जल्दबाजी में लाया गया कदम बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि इसे स्थायी समिति को भेजकर और अधिक चर्चा की जानी चाहिए थी।

कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप है। उनके अनुसार, निकाह और उत्तराधिकार जैसे विषय शरीयत और कुरान के तहत आते हैं और इन्हें बदला नहीं जा सकता।

आगे की रणनीति 

विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। वहीं सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।

Read This Also:- UP विधानसभा चुनाव 2027: BJP का संतुलन मंत्रिमंडल प्लान