मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर टिप्पणी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। जोशी ने कहा कि जब तक चुनाव निष्पक्ष होते हैं और ब्यूरोक्रेसी में पारदर्शिता रहती है, तब तक लोगों द्वारा चुनी गई सरकारें खत्म नहीं होंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि संविधान का उल्लंघन होता है, तो इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट को करनी चाहिए। जोशी 21वें FICCI हायर एजुकेशन समिट के अवसर पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
विपक्ष और प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांग पर बात करते हुए जोशी ने कहा, "लोगों की, लोगों के लिए और लोगों द्वारा बनाई गई सरकारें धरती से खत्म नहीं होंगी, बशर्ते चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें अकाउंटेबल हों और ब्यूरोक्रेसी ट्रांसपेरेंट हो।"
उन्होंने विपक्ष के जवाबदेह होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, और कहा कि "हर बात संविधान के दायरे में होनी चाहिए।" विपक्ष ने 25 सितंबर को 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों और चुनाव कमिश्नरों के बीच मतभेदों का जिक्र था।
छात्रों की मांगों पर सहानुभूति
जोशी ने छात्रों की मांगों को सुनने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "छात्रों की उचित या जायज मांगों को हमेशा सहानुभूति के साथ सुनना चाहिए, लाठीचार्ज का तरीका सही नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई समस्या है, तो उनकी बात सुनें। वे हमारे बच्चे हैं।" जोशी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब बच्चा अपने पिता से शिकायत करता है, तो पिता उसे समझाते हैं, न कि उसे भगा देते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विचार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा कि इसका मूल्यांकन अभी जल्दीबाजी होगी। उन्होंने कहा, "एनईपी 2020 नई है... इसे लागू हुए अधिक समय नहीं हुआ है।"
जोशी ने दो महीने पहले भी ऐसे चिंताओं की चर्चा की थी, जब नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।





