गोयल का तीखा पलटवार
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के संदर्भ में विपक्ष तथा पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की आलोचनाओं पर कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये आलोचक 'सेब की तुलना सेब से' करने में भी असफल हैं और देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही है। उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से विकसित हो रहा है।
आलोचनाओं का खंडन
पीयूष गोयल ने कहा, "नकारात्मक बातें करने वाले लोग जो भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि वे पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखलाओं के आंकड़ों की तुलना कर जनता को गुमरा कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।"
उन्होंने यह भी बताया कि आलोचक रोजगार के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग में वृद्धि हो रही है। गोयल ने तिरुपुर के उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा, "तिरुपुर में एक लाख श्रमिक भेजिए, हम उन्हें काम देंगे।"
सरकार का स्पष्टीकरण
सरकार ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि 2.6 प्रतिशत वृद्धि का दावा पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखलाओं के आंकड़ों को मिलाकर किया गया है, जो उचित तुलना नहीं है।
पुरानी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया था, जबकि नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में लिया गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि जीडीपी आंकड़ों में बदलाव सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है।
आर्थिक वृद्धि की वास्तविकता
गोल ने यह बताया कि आर्थिक वृद्धि की तुलना स्थिर कीमतों पर की जाती है, जिससे कीमतों के बदलाव का प्रभाव समाप्त हो जाता है और वास्तविक उत्पादन वृद्धि का पता चलता है। अप्रैल से जून तक के तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहन जैसे कई क्षेत्रों में उत्पादन में सुधार देखा गया है।
विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक डिफ्लेटर आने का कारण यह है कि विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक जीवीए 9.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही। यह डबल-डिफ्लेशन पद्धति के कारण हो सकता है, जिसमें उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है।
नई श्रृंखला की विश्वसनीयता
15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने नई जीडीपी श्रृंखला के बारे में कहा कि यह अधिक विश्वसनीय है और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का उपयोग किया जाता है, जिससे सटीकता बढ़ती है।
इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का उपयोग किया गया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में बदलाव को बारीकी से शामिल किया जा सकता है।





