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एक स्टार एक्टर से लोकसभा सांसद तक... धर्मेंद्र का कैसा रहा राजनीतिक करियर?

धर्मेंद्र अपने राजनीतिक करियर में लोकसभा सांसद के पद पर कार्यकाल के दौरान, ज्यादातर सितारों की तरह, संसदीय मामलों में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हुए।

एक स्टार एक्टर से लोकसभा सांसद तक... धर्मेंद्र का कैसा रहा राजनीतिक करियर?
फोटो: Dharmendra Death News, Dharmendra political career
1970 दशक के फेमस अभिनेता धर्मेंद्र देओल का मुंबई में सोमवार को निधन हो गया। सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे यह दिग्गज अभिनेता बॉलीवुड के सबसे स्थायी आइकन में से एक थे, एक अभिनेता जिनका करियर छह दशकों और 300 फिल्मों से अधिक लंबा था।

धर्मेंद्र देओल का जन्म पंजाब के साहनेवाल में हुआ था। जिसके बाद वह एक स्थायी परिवार से निकलकर बॉलीवुड के चहेते "ही- मैन" बन गए, जिन्होंने रोमांस और कॉमेडी में उत्कृष्टता हासिल करते हुए एक्शन स्टारडम को नए सिरे से परिभाषित किया।

धर्मेंद्र का राजनीतिक करियर


धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं , बल्कि एक राजनेता भी थे। उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में चुनावी राजनीति भी की। 2004 में धर्मेंद्र ने राजनीतिक करियर की शुरुआत कर राजस्थान के बीकानेर से बड़ी जीत हासिल की और 2004 से 2009 तक एक कार्यकाल के लिए सांसद बनने तक का सफर पूरा किया।

धर्मेंद्र ने 2004 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के रामेश्वर लाल डूडी को एक लाख से अधिक मतों से हराया था, जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने जीत हासिल की थी।

धर्मेंद्र अपने राजनीतिक करियर में लोकसभा सांसद के पद पर कार्यकाल के दौरान, ज्यादातर सितारों की तरह, संसदीय मामलों में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हुए। वहीं सदन के सत्र के दौरान धर्मेंद्र शायद ही कभी संसद गए थे, बल्कि वे फिल्मों की शूटिंग या अपने फार्म हाउस पर काम करने का समय बिताना पसंद करते थे, जिसके लिए उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। जिसके बाद भी वह छिटपुट सार्वजनिक कार्यक्रमों और अपने निरंतर सांस्कृतिक प्रभाव के माध्यम से अपने निर्वाचन क्षेत्र में राजनीति से जुड़े रहें।

हालांकि, धर्मेंद्र का राजनीतिक करियर खत्म होने के बाद, उनकी राजनीति विरासत में उनके परिवार ने आगे चलकर कमान संभाली। जिसमें धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल भी 2019 से 2024 तक पंजाब के गुरदासपुर से सांसद रहे हैं। वहीं धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी भी 2014 से लगातार तीसरी बार मथुरा से भाजपा सांसद हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान भड़का था विवाद


2004 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान धर्मेंद्र ने कहा था कि मतदाताओं को उन्हें इसलिए चुनना चाहिए ताकि वे नैतिक अनुशासन लागू करने और समाज में सुधार लाने के लिए एक तानाशाह बन सकें। जिसके बाद विवाद गहरा गया, धर्मेंद्र ने आगे सुझाव दिया था कि लोगों को उन्हें तानाशाह के रूप में चुनना चाहिए ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि कुछ नैतिक मानदंडों का पालन किया जाए।

इस टिप्पणी के बाद धर्मेंद्र को विपक्ष ने घेरना शुरू कर दिया था। बाद में उन्होंने इस टिप्पणी को ज्यादा तवज्जो ना देते हुए कहा कि उनका आशय मज़ाक में था और इसका शाब्दिक अर्थ गलत तरीके से नहीं लिया जाना चाहिए।

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