Molitics Logo
होम राष्ट्रीय Farmer Protest: 21 जनवरी को दिल्ली मार्च का ऐलान, पैदल यात्रा शुरू, केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा
राष्ट्रीय

Farmer Protest: 21 जनवरी को दिल्ली मार्च का ऐलान, पैदल यात्रा शुरू, केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा

पंजाब और हरियाणा के किसान कई महीनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, और अब उन्होंने एक बार फिर दिल्ली मार्च का ऐलान किया है। किसान यूनियनों |

Farmer Protest:  21 जनवरी को दिल्ली मार्च का ऐलान, पैदल यात्रा शुरू, केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा
फोटो: Farmer Protest, Delhi,
पंजाब और हरियाणा के किसान कई महीनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, और अब उन्होंने एक बार फिर दिल्ली मार्च का ऐलान किया है। किसान यूनियनों ने अपने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है, और गुरुवार को घोषणा की कि वे 21 जनवरी 2021 को हरियाणा की सीमा पार करने का प्रयास करेंगे। इस आंदोलन में 101 किसानों का एक समूह शामिल होगा, जिसे "मरजीवड़ा" नाम दिया गया है। "मरजीवड़ा" का मतलब है वे लोग जो अपनी जान देने के लिए तैयार हैं, और यह नाम उनके आंदोलन की गंभीरता और उनकी दृढ़ निश्चय को दर्शाता है। यह कदम उस वक्त की याद दिलाता है जब 2021 में किसान आंदोलन ने एक नई दिशा ली थी। उस समय किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए 26 जनवरी को एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली थी। 

इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए जबरन सेंट्रल दिल्ली में प्रवेश किया था। इस दौरान आंदोलनकारी किसानों ने लाल किले की प्राचीर पर अपने झंडे फहराए थे, जो कि एक ऐतिहासिक और विवादास्पद घटना बन गई थी। हालांकि, बाद में पुलिस ने उन झंडों को हटा लिया था और प्रदर्शनकारियों को लाल किले से खदेड़ दिया था। अब, किसान एक बार फिर दिल्ली में घुसने की कोशिश करेंगे, और उनका लक्ष्य 21 जनवरी को शंभू बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करना है। यह आंदोलन तब से लगातार जारी है जब किसान 13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इससे पहले किसानों ने तीन बार दिल्ली में घुसने का प्रयास किया था, लेकिन वे हर बार असफल रहे थे। 

उन्होंने 6, 8 और 14 दिसंबर को दिल्ली मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार उन्हें अपनी योजना में सफलता नहीं मिली। किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सर्वन सिंह पंधेर ने इस मार्च की घोषणा करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि केंद्र सरकार हमारे साथ बातचीत करने के मूड में है। हमारी 101 किसानों की टीम 21 जनवरी को फिर से एक और प्रयास करेगी। अब यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह हमारी जायज मांगों को पूरा करती है या हमें मार डालती है।" उनके इस बयान से यह साफ है कि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं, और अगर सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है, तो वे अपनी आवाज़ उठाने में पीछे नहीं हटेंगे।

 यह आंदोलन न केवल कृषि कानूनों के खिलाफ है, बल्कि किसानों के जीवन और उनके भविष्य को लेकर गहरी चिंताओं का भी प्रतीक है। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांगों में केवल कृषि कानूनों की वापसी ही नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी में सुधार, उचित समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और उनके खिलाफ चल रही जमानत रद्द करने की प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है। किसानों के इस संघर्ष का असर न केवल पंजाब और हरियाणा, बल्कि पूरे देश में महसूस किया गया है। कई राज्य सरकारें इस आंदोलन के पक्ष में खड़ी हैं, जबकि केंद्र सरकार ने इसे नकारते हुए इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। 

किसानों का मानना है कि उनके बिना किसी रुकावट के चल रहे इस आंदोलन से न केवल उनकी आवाज़ सुनी जाएगी, बल्कि सरकार को उनकी मांगे पूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। किसान आंदोलन अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है, और 21 जनवरी को होने वाले इस आंदोलन से यह प्रतीत होता है कि किसान अपनी मांगों को लेकर और भी संगठित और दृढ़ निश्चयी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस बार किस तरीके से इस मुद्दे से निपटती है, और क्या किसान अपनी मांगों के लिए सफल हो पाते हैं या आंदोलन और भी तेज़ हो जाएगा।

Read This Also:- महाकुंभ की सफाई और सुरक्षा से खुश किसान नेता राकेश टिकैत, अखिलेश को दिया करारा जवाब