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राष्ट्रीय • तमिलनाडु

डीएमके सांसदों की बैठक: परिसीमन विधेयक पर चर्चा की संभावना

डीएमके सांसदों की बैठक में महिला आरक्षण पर भी चर्चा की जाएगी।

डीएमके सांसदों की बैठक: परिसीमन विधेयक पर चर्चा की संभावना
फोटो: DMK MPs Meeting: Discussion on Delimitation Bill Likely

संसद के विशेष सत्र की संभावना

हाल ही में समाप्त हुए संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान अब तक नहीं किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार विशेष सत्र बुलाने की संभावना को बनाए रखी है। पिछले कुछ महीनों में इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार परिसीमन विधेयक पर चर्चा के लिए विशेष सत्र आयोजित कर सकती है। हालांकि, इसके लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जो वर्तमान में सत्तारूढ़ एनडीए के पास नहीं है।


इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बहुमत को हासिल करने के प्रयास में जुटी हुई है। इस संदर्भ में, डीएमके नेता एमके स्टालिन की पार्टी से बातचीत की जा रही है। आज स्टालिन ने डीएमके संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक चेन्नई में बुलाई है।


डीएमके की बैठक का एजेंडा

एमके स्टालिन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में लोकसभा के 22 और राज्यसभा के 8 सांसद शामिल होंगे। बैठक के एजेंडे में राज्य और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।


हाल के दिनों में एनडीए का आत्मविश्वास बढ़ा है, खासकर तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने के बाद। इससे डीएमके, जो कांग्रेस और INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।


लोकसभा में बहुमत का गणित

लोकसभा में कुल 540 सांसद हैं, और सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए 360 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में NDA के पास 292 सांसद हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें 68 और वोटों की आवश्यकता है। तृणमूल के बागी सांसदों के शामिल होने से संख्या 312 हो जाती है।


अगर शिवसेना (UBT) के बागी सांसद भी समर्थन देते हैं, तो यह संख्या 318 हो जाएगी। यदि डीएमके समर्थन की घोषणा करती है, तो एनडीए की कुल संख्या लोकसभा में 340 तक पहुँच जाएगी। इसके अलावा, भाजपा को शरद पवार गुट के NCP से भी समर्थन की उम्मीद है।


विशेष सत्र की राजनीतिक चर्चाएं

चूँकि संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के अंत में संभावित होना है, इसलिए राजनीतिक हलकों में विशेष बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आमतौर पर, मॉनसून सत्र समाप्त होने के एक सप्ताह के अंदर सत्रावसान होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इसे जारी रखा है। यह स्थिति सरकार को कभी भी विशेष सत्र बुलाने की सुविधा देती है।


सूत्रों के अनुसार, सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लाने की तैयारी कर रही है। यदि सरकार ने आवश्यक संख्या जुटा ली, तो विशेष बैठक अक्तूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के शुरूआती दिनों में बुलाई जा सकती है।


कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने केंद्र को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि बिना व्यापक परामर्श के एक और संवैधानिक विधेयक को पारित कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने मॉनसून सत्र के सत्रावसान में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं।


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने 17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन बिल की हार का भी जिक्र किया है। खरगे ने कहा कि व्यापक परामर्श के बिना किसी और संवैधानिक संशोधन बिल को पारित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।