परियोजना रद्द करने का निर्णय
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द करने के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। स्टालिन ने कहा कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी, और इसका रद्द होना तमिलनाडु के विकास पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य के हितों को छोटी राजनीतिक सोच के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकता है।
स्टालिन ने युवाओं के रोजगार के अवसरों पर इस निर्णय के बुरे प्रभाव का भी उल्लेख किया, यह कहते हुए कि यह उनके सपनों के लिए एक बड़ा नुकसान है।
विधानसभा में सवाल उठाते हुए
विधानसभा में स्टालिन ने नियम 110 के तहत मुख्यमंत्री की घोषणा पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि इसके तहत चर्चा की अनुमति नहीं होने से बहस की संभावना समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन निर्माण और अन्य क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है, और ऐसे में चेन्नई के लिए एक विश्वस्तरीय हवाई अड्डा केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है।
स्टालिन ने यह भी दावा किया कि डीएमके सरकार ने सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद परंदूर को चुना था और किसानों को भूमि अधिग्रहण के लिए तीन गुना मुआवजा देने की व्यवस्था पर बड़ी रकम खर्च की गई थी।
विकास की गति पर प्रभाव
पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, 'प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक मंजूरियां और प्रारंभिक तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, ताकि सत्ता में लौटने पर निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।' उनका कहना था कि यदि नई सरकार अब किसी अन्य स्थान की तलाश कर नई प्रक्रिया शुरू करती है, तो इससे राज्य की विकास गति कई साल पीछे जा सकती है।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी इस परियोजना को रद्द करने के निर्णय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बढ़ती हवाई यात्री संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डीएमके सरकार ने इसका आरंभ किया था।
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
उदयनिधि ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना को राजनीतिक कारणों से रद्द किया गया, तो सरकार को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, परंदूर परियोजना से प्रभावित एक गांव एकनापुरम के निवासियों ने मुख्यमंत्री विजय के निर्णय का स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में यह घोषणा की कि परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को पूरी तरह से छोड़ दिया जाएगा और चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए वैकल्पिक स्थान की तलाश की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन स्थानीय समुदायों की कीमत पर किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा।





