Molitics Logo
होम राष्ट्रीय दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई, नई भूमिका पर अटकलें तेज
राष्ट्रीय

दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई, नई भूमिका पर अटकलें तेज

दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई के बाद भी राजनीति में सक्रिय रहेंगे, नई भूमिका और रणनीतिक पहल के जरिए कांग्रेस में उनकी अहमियत बरकरार रहेगी।

दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई, नई भूमिका पर अटकलें तेज
फोटो: Digvijaya Singh Rajya Sabha farewell, Digvijaya Singh latest news
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई के बाद भी उनके राजनीतिक सफर पर विराम लगने के कोई संकेत नहीं हैं। 79 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता और ऊर्जा उन्हें पार्टी के भीतर एक अहम चेहरा बनाए हुए है। अपने विदाई भाषण में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्ति "न मैं टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं” दोहराकर साफ कर दिया कि राजनीति में उनकी भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है।

दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के रणनीतिकार रहे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा से विदाई के बाद भी उनके सामने फिलहाल सक्रिय पदों के विकल्प सीमित दिखते हैं। राज्य की राजनीति में उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह की मजबूत उपस्थिति के कारण उनके लिए जगह कम हो गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर भी कोई बड़ा पद खाली नजर नहीं आता। इसके बावजूद पार्टी के कई नेता मानते हैं कि उनका अनुभव अभी भी कांग्रेस के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है।

हिंदुत्व बनाम सनातन पर मुखर रुख

दिग्विजय सिंह की ताज़ा ख़बरें बताती हैं कि वे राजनीतिक व्यक्तित्व हमेशा से वैचारिक बहसों के केंद्र में रहा है। वे भाजपा और संघ के ‘हिंदुत्व’ की आलोचना करते हुए खुद को सनातन धर्म का समर्थक बताते हैं। उनका मानना है कि ‘सर्वधर्म समभाव’ ही सनातन की असली पहचान है। हाल ही में रामनवमी के अवसर पर उनकी अयोध्या यात्रा ने भी यह संकेत दिया कि वे धार्मिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए रखेंगे।

अतीत के प्रयोग, आज भी प्रासंगिक

दिग्विजय सिंह के राजनीतिक जीवन में कई ऐसे प्रयोग रहे हैं, जिनकी चर्चा आज भी होती है। 2002 का ‘दिघोरी सम्मेलन’ इसका उदाहरण है, जहां उन्होंने विभिन्न शंकराचार्यों को एक मंच पर लाकर राम मंदिर मुद्दे पर नया विमर्श खड़ा किया था। उस समय सोनिया गांधी की मौजूदगी और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिक्रिया ने इसे राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया था।

नर्मदा परिक्रमा से बदली सियासी हवा

2017-18 में दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा उनके राजनीतिक करियर का एक अहम पड़ाव रही। करीब 192 दिनों में 3,300 किलोमीटर से अधिक की यह यात्रा मध्य प्रदेश के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी। इसके बाद 2018 के चुनाव में कांग्रेस की जीत को इस यात्रा से भी जोड़कर देखा गया।

क्या आगे मिलेगा बड़ा दायित्व 

2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में उनका नाम अचानक सामने आया था, लेकिन अंततः मल्लिकार्जुन खरगे को जिम्मेदारी मिली। अब सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में पार्टी उन्हें कोई बड़ी भूमिका सौंप सकती है। कई नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी उन्हें हिंदू समाज और संतों के बीच संवाद का सेतु बना सकते हैं।

राज्यसभा से विदाई के बाद भी दिग्विजय सिंह की सक्रियता यह संकेत देती है कि उनकी सियासी यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले समय में वे किस भूमिका में नजर आएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

Read This Also:- नितिन नबीन का MLA पद से इस्तीफा, बांकीपुर में हलचल तेज