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परिसीमन विधेयक: कांग्रेस की रणनीति, संसद से पहले चेतावनी

20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के पहले विपक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस ने बताया है कि अगर सरकार सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक

परिसीमन विधेयक: कांग्रेस की रणनीति, संसद से पहले चेतावनी
फोटो: परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस की रणनीति, संसद सत्र से पहले सख्त चेतावनी

परिसीमन विधेयक: संसद सत्र से पहले विपक्ष का एकजुटता का दावा

20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के पहले विपक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस ने बताया है कि अगर सरकार सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक को पुनः प्रस्तुत करती है, तो पार्टी इसका विरोध करेगी। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक में यह निर्णय लिया गया।


इस बैठक में विपक्षी एकता, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले विधेयकों और संसद में सरकार को घेरने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी कि पार्टी ने उन विधेयकों पर भी चर्चा की है, जो सरकार सत्र के दौरान पेश कर सकती है।


परिसीमन विधेयक का विरोध जारी

जयराम रमेश ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के परिसीमन विधेयक को फिर से लाने की चर्चा चल रही है, जिसे भाजपा 17 अप्रैल को दो तिहाई बहुमत न होने के कारण पारित नहीं कर पाई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस बिल का विरोध जारी रखेगी, साथ ही विपक्षी एकता बनाए रखने की दिशा में भी प्रयास करेगी।


उन्होंने कहा कि यदि सरकार मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू कर 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना चाहती है, तो कांग्रेस इसका समर्थन करने के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।


प्रधानमंत्री को लिखा गया पत्र

इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।


इस पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ विचार-विमर्श करे।


भाजपा ने आरोपों का खंडन किया

उधर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को नकार दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मॉनसून सत्र में परिसीमन पर संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए भाजपा विपक्षी दलों को विभाजित कर रही है।


भाजपा ने यह स्पष्ट किया कि जो नेता विपक्ष छोड़कर अन्य पार्टियों में शामिल हो रहे हैं, वे दल-बदल रोधी कानून का पालन कर रहे हैं और उनके इस कदम को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता।


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