परिसीमन और संविधान 131वां बिल
लोकसभा में बिलों पर बहस शुरू होने से पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि चर्चा के लिए कुल 12 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि तीनों बिलों पर मतदान कल शाम 4 बजे होगा। कानून मंत्री मेघवाल ने बहस की शुरुआत करते हुए इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि लोकसभा में परिसीमन और संविधान 131वां बिल, 2026 देशहित में आवश्यक हैं और महिलाओं के विकास को सशक्त बनाएंगे।
वोटिंग में संविधान संशोधन बिल पर 333 सांसदों ने हिस्सा लिया। इसके पक्ष में 207 और विरोध में 126 सांसदों ने वोट किया। डिलिमिटेशन और अन्य बिलों पर भी लोकसभा में मतदान हुआ, केंद्र सरकार का बिल लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन विपक्ष ने बिल का विरोध जोरदार तरीके से किया।
विपक्षी सांसदों की आपत्ति
समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनके दल को महिला आरक्षण का समर्थन है, लेकिन यह बिल संविधान के अन्य पहलुओं के संदर्भ में समस्या खड़ी कर सकता है। DMK के टीआर बालू, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, TMC और CPI-M ने भी बिलों का विरोध किया। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने बिलों के टेक्निकल पहलुओं पर आपत्ति जताई, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिल की मेरिट पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
आरक्षण पर विवाद
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी में शामिल नहीं हैं और बिल को जनगणना से पहले पेश किया जा रहा है। अमित शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि जाति और धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अपनी सीटें मुस्लिम आबादी को दे दे, लेकिन सरकार के बिल देशहित में हैं।
आगे की कार्यवाही
राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई है। संसद में बहस और वोटिंग का क्रम जारी है, जिससे यह तय होगा कि महिला आरक्षण और अन्य महत्वपूर्ण विधेयक कैसे लागू होंगे। इस बहस ने संसद में एक बार फिर बिलों के पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प दिखाई।





