कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद इमरान मसूद ने अखिलेश यादव के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह अखिलेश यादव का व्यक्तिगत निर्णय है, और अगर वे यूपी में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखने का इरादा नहीं रखते तो उन्हें यह सार्वजनिक रूप से घोषित करना चाहिए। मसूद ने कहा, "उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 43 सीटें राहुल गांधी के नेतृत्व में जीती हैं, यह कांग्रेस की ताकत है।" इमरान मसूद ने आगे कहा, "यह अखिलेश जी का फैसला है, हमारा नहीं। यदि वे उत्तर प्रदेश में कहें कि हम कांग्रेस के साथ नहीं रहेंगे, तो हमें उनकी बात समझ में आएगी।" उन्होंने इस मामले में कांग्रेस के योगदान पर जोर दिया और कहा कि कांग्रेस की वजह से ही यूपी में सपा के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
इसके अलावा, इमरान मसूद ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव ने इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी का समर्थन देने का मतलब यह नहीं है कि वे कांग्रेस के खिलाफ हैं, और यह उनके व्यक्तिगत निर्णय का हिस्सा है। बावजूद इसके, कांग्रेस के भीतर इस निर्णय को लेकर असंतोष है, क्योंकि सपा और कांग्रेस का लंबे समय से गठबंधन रहा है, और दिल्ली विधानसभा चुनाव के इस निर्णय को लेकर कांग्रेस ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में 1490 उम्मीदवारों ने दाखिल किए नामांकन
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हो गई, और इस दौरान कुल 615 नामांकन दाखिल किए गए, जिससे अब तक कुल 1490 नामांकन हो चुके हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, सभी रिटर्निंग ऑफिसर के यहां देर शाम तक नामांकन की प्रक्रिया चलती रही, जिसके कारण नामांकनों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। नामांकन प्रक्रिया के अंत में यह स्पष्ट हो गया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, क्योंकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए हैं।
नाम वापसी के लिए दो दिन आरक्षित
दिल्ली में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना 10 जनवरी को जारी की गई थी, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। गुरुवार तक कुल 555 उम्मीदवारों ने 841 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। 17 जनवरी को नामांकन की आखिरी तारीख थी। अब, चुनाव आयोग 18 जनवरी को सभी नामांकनों की जांच करेगा, और सही पाए गए दस्तावेजों के आधार पर उम्मीदवारों को अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा। इसके बाद, 19 और 20 जनवरी को नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिनमें उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र को वापस ले सकते हैं यदि वे अपनी दावेदारी से पीछे हटने का निर्णय लेते हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए यह नामांकन प्रक्रिया राज्य के राजनीतिक माहौल को और अधिक दिलचस्प बना देती है, क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। इन नामांकनों में बढ़ोतरी और नाम वापसी की प्रक्रिया से चुनावी मैदान में और भी बदलाव आ सकते हैं। चुनाव आयोग की ओर से नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह साफ हो जाएगा कि कौन से उम्मीदवार इस चुनावी दौड़ में बने रहेंगे और कौन बाहर हो जाएंगे।
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