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केरल में दलित ईसाइयों को आरक्षण पर बहस तेज, भाजपा ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने दलित ईसाइयों को आरक्षण देने का आश्वासन दिया है, जबकि भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के नेताओं ने धर्मांतरण के बाद आरक्षण की मांग को असंगत बताया।

केरल में दलित ईसाइयों को आरक्षण पर बहस तेज, भाजपा ने उठाए सवाल
फोटो: केरल में दलित ईसाइयों को आरक्षण पर बहस तेज, भाजपा ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री का आश्वासन

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने दलित ईसाइयों की आरक्षण संबंधी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। सामाजिक सुधारक अय्यनकाली की 163वीं जयंती समारोह में बोलते हुए, सतीशन ने कहा कि दलित ईसाइयों को ईसाई समुदाय और अनुसूचित जातियों (SC) से मिलने वाले लाभों से वंचित रखा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस समुदाय के पिछड़ेपन का गहन अध्ययन करेगी और समाधान खोजने का प्रयास करेगी।


सतीशन के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है।


भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शाजूमोन वट्टेक्कड़ ने सतीशन के बयान को तुष्टिकरण की राजनीति करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अनुसूचित जाति के अधिकारों में कटौती कर दलित ईसाइयों को लाभ पहुंचाने का प्रयास करेगी, तो एससी मोर्चा पूरे राज्य में इस मुद्दे के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगा।


भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष केएस राधाकृष्णन ने सवाल उठाया है कि यदि धर्म परिवर्तन से जातिगत पहचान और उत्पीड़न समाप्त हो जाता है, तो अनुसूचित जाति के दर्जे की मांग का कोई औचित्य नहीं रह जाता।


राजनीतिक रणनीति और दुविधा

भाजपा पिछले कुछ समय से अपने पारंपरिक हिंदू वोट बैंक के अलावा ईसाई मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। इस राजनीतिक परिदृश्य में दलित ईसाइयों का मुद्दा भाजपा के लिए एक जटिल समस्या बन गया है।


पार्टी ने राज्य में ईसाइयों को आकर्षित करने के लिए कई चर्चित ईसाई नेताओं को अपने साथ शामिल किया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच कई मुद्दों पर समान हित हैं।


धर्मांतरण पर आंतरिक मतभेद

धर्मांतरण हमेशा से संघ परिवार और भाजपा के भीतर एक संवेदनशील विषय रहा है। हाल ही में जब केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने छत्तीसगढ़ में कैथोलिक ननों का बचाव किया, तो कुछ संगठनों ने उनकी आलोचना की थी।


इस बीच, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान भाजपा नेतृत्व ने ईसाई संगठनों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया, जबकि स्थानीय हिंदुत्ववादी संगठनों ने चर्चों को मिलने वाले विदेशी धन पर कड़ी निगरानी की मांग की।


संविधान के तहत आरक्षण की स्थिति

वर्तमान में संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों तक सीमित है। ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाने वाले दलित इस आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।


दलित ईसाइयों का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के कारण उन्हें अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।


स्थानीय मुद्दा और राष्ट्रीय आयोग

केरल के कोट्टायम, पथानामथिट्टा और इडुक्की जिलों में दलित ईसाइयों की संख्या अच्छी खासी है, जहाँ भाजपा अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


इस विषय पर अध्ययन के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) के. जी. बालकृष्णन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया है, जिसकी समय-सीमा जून 2026 तक बढ़ाई गई है।