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राष्ट्रीय • दिल्ली

बागी सांसदों के लिए संकट गहराया, ओम बिरला को जवाब देने में फिर हुई चूक

बागी सांसदों ने स्पीकर को जवाब देने की एक और डेडलाइन का पालन नहीं किया है।

बागी सांसदों के लिए संकट गहराया, ओम बिरला को जवाब देने में फिर हुई चूक
फोटो: Crisis Deepens for Rebel MPs as Om Birla Misses Deadline Again

बागी सांसदों की स्थिति

सायोनी घोष सहित 20 बागी सांसदों के लिए समस्याएँ बढ़ने की संभावना है। दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को जवाब देने की एक और निर्धारित तिथि, जो NCPI (नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय करने वाले सांसदों के लिए थी, बीत चुकी है। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने स्पीकर से समय बढ़ाने की मांग की है, लेकिन इस बारे में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं हुई है।


विशेष रूप से, अयोग्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को शीघ्र निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया था।


डेडलाइन का विस्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ने बागी सांसदों को जवाब देने के लिए गुरुवार तक का समय दिया था। हालाँकि, अब खबरें आ रही हैं कि उन्होंने स्पीकर से दो और सप्ताह का समय मांगा है। यह ध्यान देने योग्य है कि पहले भी तीन बार समय बढ़ाने की मांग की जा चुकी है, जिसमें पहले सात दिनों का और फिर तीन एवं चार सप्ताह का समय दिया गया था।


22 सितंबर को सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था, 'हमने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर तीन सप्ताह का समय मांगा था, जो हमें दिया गया। अब हमें कुछ और समय चाहिए क्योंकि 20 सांसदों को सभी दस्तावेज एकत्र करने हैं।'


सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सायोनी घोष, यूसुफ पठान और अन्य 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर NCPI में शामिल हो गए थे। इस दल बदल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। शीर्ष न्यायालय ने इस मामले पर जल्द निर्णय लेने के लिए स्पीकर को कहा था। वर्तमान में, लोकसभा के रिकॉर्ड्स में ये सांसद तृणमूल के सदस्यों के रूप में दर्ज हैं।


तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने जून में उनकी अयोग्यता की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएँ दायर की थीं।


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ

23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि वह लोकसभा स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकती, लेकिन यह महज एक याद दिलाने जैसा है कि मामले का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जिन मामलों में जल्द फैसले की जरूरत है, उन पर तेजी से कार्रवाई होगी।'


जस्टिस बागची ने भी इस संदर्भ में कहा कि 10वीं अनुसूची के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस मामले का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ

यहाँ उल्लेख करना आवश्यक है कि केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि अध्यक्ष को उचित समय के भीतर, बेहतर होगा कि तीन महीनों के अंदर, निर्णय लेना चाहिए। यह निर्णय इस मामले में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।