मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में किए गए बयान पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भागवत ने कहा था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह असली हिंदू नहीं रह जाता। इस पर संदीप दीक्षित ने कहा, 'इस सोच वाले व्यक्ति में इंसानियत की कमी है, धर्म उसकी दूसरी बात है।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर आप अमेरिका में वो बातें कहें जो सावरकर ने की थीं, तो सोचिए कि वहां आपकी स्थिति क्या होती। शायद आपका वीजा भी रद्द हो जाता।' यह बयान भागवत के विचारों के प्रति उनकी नाखुशी को दर्शाता है।
संघ की किताबों में मुसलमानों का उल्लेख
संदीप दीक्षित ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि संघ की प्राथमिक किताबों में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत के तीन दुश्मन हैं- मुसलमान, कम्युनिस्ट और क्रिश्चियन। उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर इन लोगों को दुश्मन माना गया है, तो समानता की बात कैसे की जा सकती है।
उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि 'अगर आपके ग्रंथ बदल गए हैं, तो यह बात पहले की स्थिति पर लागू होती है। आप बार-बार हिंदू राष्ट्र का जिक्र करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह है कि जो हिंदू नहीं है, वह समान नागरिक नहीं हो सकता।'
सावरकर और गोलवरकर पर टिप्पणी
संदीप दीक्षित ने सावरकर और गोलवरकर के संदर्भ में कहा कि एक तरफ संघ हिंदू धर्म और हिंदू राष्ट्र का प्रचार कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ वे सावरकर को भगवान मानते हैं और गोलवरकर को गुरु मानते हैं। उनका कहना था कि जो लोग अपनी पुण्य भूमि भारत से जुड़े नहीं हैं, वे कभी देश के प्रति सच्चे नहीं हो सकते।
उन्होंने कहा, 'पुण्य भूमि का मतलब है कि जिनके इष्टदेव यहीं पैदा हुए, जिसमें सिख, जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म शामिल हैं। इस तरह से मुसलमानों और ईसाइयों को अलग रखा गया है।'
संघ की विचारधारा पर सवाल
संदीप दीक्षित ने यह भी कहा कि जो लोग सावरकर के विचारों का समर्थन करते हैं, वे भी असली हिंदू नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, 'आपको अमेरिका में कुछ मानदंडों के अनुसार बोलना होता है। इसलिए यह केवल छलावा है। संघ में प्रशिक्षित किया गया है कि जो कहना हो, वो कह दो, लेकिन अंदर से जहर फैलाते रहो।'





