कांग्रेस को बड़ा झटका
कांग्रेस पार्टी को असम में एक महत्वपूर्ण चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। सिलचर नगर निगम चुनाव में पार्टी को केवल दो सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने 32 सीटों पर विजय प्राप्त की। यह हार ऐसे समय में आई है, जब कांग्रेस SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और बैलेट पेपर पर चुनाव कराए जाने की मांग उठा रही है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस हार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी जीत नहीं सकी। उन्होंने कहा, 'बैलेट पेपर पर कांग्रेस की हार कहीं अधिक बड़ी है। जब तक मतदान बैलेट पेपर द्वारा होता है, कांग्रेस को और अधिक हार का सामना करना पड़ेगा।'
अल्पसंख्यक सीटों पर भी हार
सीएम सरमा ने कहा कि सिलचर क्षेत्र में 10 सीटें अल्पसंख्यकों की थीं, जहां कांग्रेस को वोट मिलना चाहिए था। लेकिन वहां भी पार्टी को समर्थन नहीं मिला, और वह केवल दो सीटें ही प्राप्त कर सकी। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 5 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा और असम गण परिषद ने क्रमशः 32 और 2 सीटों पर जीत हासिल की।
सरमा ने कहा, 'हमने नारा दिया है कि आप मशीन पर भी हारने वाले हैं और बैलेट पर भी हारने वाले हैं।' यह कांग्रेस के लिए एक गंभीर संकेत है, जो लगातार बैलेट पेपर के समर्थन में बात कर रही है।
कांग्रेस की मांगें
30 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत के विपक्षी दलों को ईवीएम के बजाय मत पत्र से चुनाव कराने की मांग करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली में लोगों का विश्वास बहाल करना आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रशासनिक खामियों और मतदाता सूचियों की विशेष जांच की जरूरत पर भी जोर दिया।
खरगे ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मत पत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि ये तीन प्रमुख मांगें हैं जिन पर उनकी पार्टी समझौता नहीं करेगी।
दिल्ली में INDIA गठबंधन का प्रदर्शन
मंगलवार को विपक्ष ने दिल्ली में INDIA गठबंधन के बैनर तले एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सांसदों और नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर पैदल मार्च किया, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें नीति आयोग के सामने रोक दिया गया।
इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, खरगे और अखिलेश यादव जैसे कई प्रमुख नेता शामिल थे। प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी ने सड़क से हटकर आकाशवाणी के पास धरना दिया, जहाँ उन्हें थोड़ी देर के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया।





