Molitics Logo
होम राष्ट्रीय कांग्रेस ने परिसीमन पर की मांग, विजय थलपति के रुख में बदलाव की अटकलें
राष्ट्रीय

कांग्रेस ने परिसीमन पर की मांग, विजय थलपति के रुख में बदलाव की अटकलें

कांग्रेस ने लोकसभा की मौजूदा सीटों को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग का समर्थन किया है। पी. चिदंबरम ने कहा कि यह निर्णय तमिलनाडु की सीटों को भी सुरक्षित रखेगा, जबकि मुख्यमंत्री विजय थलपति ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।

कांग्रेस ने परिसीमन पर की मांग, विजय थलपति के रुख में बदलाव की अटकलें
फोटो: कांग्रेस ने परिसीमन पर की मांग, विजय थलपति के रुख में बदलाव की अटकलें

परिसीमन पर कांग्रेस का नया रुख

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति ने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख बदलने की संभावनाओं को जन्म दिया है। यह चर्चा हाल ही में उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद से तेज हुई है। विजय ने इस बैठक के दौरान कहा था कि जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले राज्यों को संसद में प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। इस पर विपक्ष ने उनके बयान की आलोचना की, आरोप लगाते हुए कि वह मुद्दे से भटक रहे हैं।


हालांकि, अब कांग्रेस ने मांग की है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों के लिए बरकरार रखा जाए। इस मांग का समर्थन करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु को मिलने वाली 39 सीटें भी सुरक्षित रहनी चाहिए।


चिदंबरम का बयान

पी. चिदंबरम ने यह भी कहा कि तमिलनाडु विधानसभा और कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पारित प्रस्तावों में भी यही दृष्टिकोण शामिल है। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। चिदंबरम ने यह भी उल्लेख किया कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी टीवीके और विपक्षी दल डीएमके भी इसी रुख का समर्थन कर रहे हैं।


उनका यह बयान तब आया जब मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन विधेयक 2026 पर चिंताओं को व्यक्त किया, जिसमें कहा गया कि यदि सीटों का पुनर्वितरण आबादी के आधार पर किया गया, तो दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।


संसद में प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता

गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में विजय ने इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में यह आश्वासन मांगा कि जिन राज्यों ने अपनी जनसंख्या को स्थिर किया है, उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व में कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।


उन्होंने बताया कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का आवंटन स्थगित होने की अवधि समाप्त हो रही है, और इस संदर्भ में दक्षिणी राज्यों में यह चिंता जताई जा रही है कि आबादी के आधार पर परिसीमन उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है।


तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव

तमिलनाडु विधानसभा ने पहले ही एक विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र से मांग की है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखा जाए। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू किया जाना चाहिए।


विजय ने आगे कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के साथ-साथ मानव विकास और आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। उनके अनुसार, इन उपलब्धियों के कारण राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।