अखिलेश यादव और आशुतोष रांका की मुलाकात
गुरुवार को लखनऊ में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह मुलाकात आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सपा ने भाजपा की सरकार पर बेरोजगारी, शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर लगातार हमला किया है।
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि हालांकि वह इस बैठक में चर्चा के विषयों के बारे में जानकारी नहीं दे सकते, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि बातचीत में युवाओं, बेरोजगारी और स्कूली शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई होगी।
स्कूली शिक्षा पर चिंता
अखिलेश यादव ने स्कूलों के बंद होने को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त की है और इस संदर्भ में केंद्र सरकार और राज्य सरकार से सवाल उठाए हैं। सूत्रों का कहना है कि रांका और यादव ने जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के कार्यालय में चार बजे से डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बैठक की।
बैठक के बाद रांका ने मीडिया से बात किए बिना स्थान छोड़ा, वहीं सपा ने भी इस मुलाकात के उद्देश्य या परिणाम पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा में छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' की चिंताओं का विषय भी शामिल हो सकता है।
छात्रों के मुद्दों पर सीजेपी की गतिविधियां
यह मुलाकात हाल के महीनों में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर CJP की देशव्यापी गतिविधियों के बीच हुई है। पिछले महीने राजस्थान में 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान रांका पर हमले के बाद, अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को उठाया था।
सीजेपी ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जहां सपा सांसद डिंपल यादव और आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव सहित अन्य नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई। अखिलेश यादव ने कई मौकों पर सीजेपी द्वारा चलाए जा रहे छात्र आंदोलनों का समर्थन किया है।
5 सितंबर का मार्च और सीजेपी का निर्णय
विशेष रूप से, सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से मार्च निकालने की योजना बनाई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। पार्टी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने जुलाई में किए गए वादों को पूरा नहीं किया। हालांकि, एफआईआर वापस लेने और मुआवजे की घोषणा के बाद सीजेपी ने इन फैसलों का स्वागत करते हुए मार्च को वापस ले लिया।





