CJP का कड़ा बयान: CJP और सरकार के बीच बढ़ी तनातनी
CJP का कड़ा बयान: पेपर लीक और परीक्षा धांधलियों के खिलाफ 36 दिनों तक चले आंदोलन के समाप्त होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है। CJP ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर आंदोलन शुरू करेंगे।
CJP के प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी विभिन्न राज्यों में छात्रों और स्वयंसेवकों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है।
सरकार का स्पष्टीकरण
CJP का कड़ा बयान: सरकारी सूत्रों ने CJP के आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई न करने का आश्वासन केवल 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों' के लिए था और इसमें हिंसक घटनाओं में शामिल लोग शामिल नहीं हैं।
एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'जे.पी. नड्डा जी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो आश्वासन दिया, वह बहुत सावधानी से दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कोई मामला दर्ज नहीं होगा, लेकिन जिन्होंने हिंसा की है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।'
राज्यों की प्रतिक्रिया
बिहार और असम जैसे एनडीए शासित राज्यों ने 26 जुलाई की शाम तक हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों पर से मामले वापस लेने और उन्हें रिहा करने की घोषणा की है। हालांकि, हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ मामले जारी रहेंगे।
इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल में 24 जुलाई की हिंसा के सिलसिले में सख्त कार्रवाई की जा रही है, जहां कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और गिरफ्तारियां हुई हैं।
CJP की चेतावनी
CJP का कड़ा बयान: CJP ने सरकार से आग्रह किया है कि यदि मंगलवार तक उन्हें हस्ताक्षरित लिखित समझौता पत्र नहीं सौंपा गया और सभी निर्दोष छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो वे देशभर में एक बार फिर आंदोलन शुरू करने का निर्णय लेंगे।
सरकार के सूत्रों का कहना है कि नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी या राहत देने के वादे पर भी सरकार सकारात्मक है।
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