हिमाचल में ‘कैबिनेट रैंक’ समाप्त, दिखावटी कदम
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हिमाचल में ‘कैबिनेट रैंक’ समाप्त होने पर इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला दिखावटी कदम बताया। ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार सच में फिजूलखर्ची रोकना चाहती, तो यह निर्णय पहले ही लेना चाहिए था, खासकर जब मुख्य संसदीय सचिवों को हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य के खजाने का दुरुपयोग अपने खास लोगों के लिए किया और अब केवल सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।
कानून व्यवस्था और वित्तीय संकट पर सवाल
जयराम ठाकुर ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और ठप पड़े विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास का माहौल बन गया है और आने वाले विधानसभा सत्र में सरकार के लिए इन मुद्दों का जवाब देना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल में ‘कैबिनेट रैंक’ समाप्त होने पर जनता इस समय सरकार की नीतियों से संतुष्ट नहीं है।
गुमराह करने और पारदर्शिता के मुद्दे
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने और आरटीआई कानून का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेषाधिकार हनन के तहत इसकी गहन जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने धारा 118 के नाम पर अवैध उगाही और उद्योगों के पलायन को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
राजनीतिक हलचल बढ़ी
इस फैसले ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक सुधार के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं विपक्ष इसे केवल राजनीतिक दिखावा और जनता को गुमराह करने वाला कदम मान रहा है। आगामी विधानसभा सत्र में इस फैसले और सरकार के वित्तीय व प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष द्वारा कड़ा प्रतिरोध किए जाने की संभावना है।
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