Breakfast meet 2.0 — जब CM और डिप्टी CM बैठे साथ नाश्ते पर
आज (2 दिसंबर 2025) फिर से Siddaramaiah और DK Shivakumar के बीच “breakfast meet 2.0” हुआ — इस बार शिवकुमार के निवास पर। यह बैठक पिछले शनिवार हुई पहली “ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी” के ठीक बाद आयी है, जब दोनों नेताओं ने पहले ही एक बार साथ नाश्ता करके एकता का संदेश देने की कोशिश की थी।
इस नए Breakfast meet 2.0 में स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, नाश्ते में इडली-सांबर, उपमा के साथ ‘नाटी चिकन’ जैसे व्यंजन शामिल थे।
शिवकुमार ने इसे “सिर्फ पारस्परिक” (reciprocal) बैठना बताया — “कुछ और नहीं”।
उद्देश्य स्पष्ट है: पार्टी के भीतर गुटबाज़ियों और सुर्खियों में रहे सत्ता-संकट को शांत दिखाना, और एकता का संदेश देना। लेकिन क्या यह सिर्फ दिखावा है या वास्तव में कोई स्थायी समाधान हो रहा है — यह देखने वाली बात है।
क्या Breakfast meet 2.0 से गुटबाज़ी खत्म? — दोनों नेताओं का बयान
पहले के आग्रह और अटकलों के बीच, इस Breakfast meet 2.0 के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने एकता का दावा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “कोई मतभेद नहीं है, पहले नहीं था, अब नहीं है और भविष्य में भी नहीं होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 2028 के चुनाव को मिलकर लड़ेंगे।
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा कि वे और सीएम “भाई की तरह” काम कर रहे हैं, और किसी तरह की गुटबाज़ी नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेतृत्व संबंधी निर्णय पार्टी हाई-कमान (High Command) करेगा, और वे उसी से सहमत हैं।
यह कोशिश, पार्टी के विभाजन को रोकने तथा बहसों को शांत करने की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने बारम्बार यह कहा कि किसी भी ईगो-क्लैश की संभावना नहीं है और वे कांग्रेस के 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए काम करेंगे।
Breakfast meet 2.0 — प्रतीकात्मक एकता या अस्थायी समझौता?
हालाँकि Breakfast meet 2.0 और इससे पहले की ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी को एकता दिखाने का प्रयास कहा जा रहा है, लेकिन विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सब सिर्फ प्रतीकात्मक है।
वास्तविक शक्ति-साझेदारी ('power sharing') पर अभी तक कोई स्पष्ट रूप नहीं आया है। डिप्टी सीएम के समर्थकों का कहना है कि 2023 के राज्य चुनाव के बाद उनके लिए एक समझौता हुआ था, जिसके अनुसार अब उन्हें मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए।
लेकिन वर्तमान में, दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने यह कहा कि किसी “पार्टी गुट” की बात ही नहीं है — इस तरह की गुटबाज़ी के दावों को दोनों ने खारिज किया है।
इसलिए, यह कहना सही होगा कि Breakfast meet 2.0 फिलहाल एक रूपक (symbolic) प्रयास है — यह दिखा रहा है कि कांग्रेस उच्च कमान और राज्य नेतृत्व, साथ में बैठकर विवाद को पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या यह सिर्फ मीडिया और जनता के लिए दिखावा है, या भविष्य में कोई असली बदलाव — power sharing, मुख्यमंत्री परिवर्तन — देखने को मिलेगा।
कांग्रेस की राह आगे: क्या 2028 चुनावों का ध्यान है?
इस Breakfast meet 2.0 का एक प्रमुख उद्देश्य 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी बताई जा रही है। दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने कहा कि उनका संयुक्त लक्ष्य कांग्रेस की वापसी और मजबूत प्रदर्शन है।
वे यह भी कह चुके हैं कि पार्टी हाई-कमान की जो भी सलाह या फैसला होगा, वे उसका पालन करेंगे — चाहे मुख्यमंत्री बने रहना हो या सत्ता-पंक्ति में बदलाव।
इस तरह, Breakfast meet 2.0 केवल एक नाश्ते की बैठक नहीं है — यह एक राजनीतिक रणनीति है, जिससे कांग्रेस अपने अंदरूनी गतिरोध को शांत करना चाहती है, ताकि अगले चुनाव में किसी भ्रम, विभाजन या धोखाधड़ी की संभावना न रहे।





