एंटी पेपर लीक विधेयक: संसद में हंगामे की आशंका
एंटी पेपर लीक विधेयक: पिछले सप्ताह संसद में भारी हंगामे के कारण कार्यवाही लगभग ठप हो गई थी। आज, सोमवार को, संसद का मॉनसून सत्र फिर से शुरू हो रहा है, जिसमें दोनों सदनों में कार्यवाही होने की संभावना है। नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सीजेपी के आंदोलन के समाप्त होने के बाद, आज की कार्यवाही को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल छात्रों पर हमले और पेलेट गन के उपयोग जैसे मुद्दों के माध्यम से सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।
इस बीच, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पश्चात, सरकार आज लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है।
कांग्रेस का गृह मंत्री पर निशाना
एंटी पेपर लीक विधेयक: सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सोमवार को सदन में पेपर लीक के खिलाफ विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधार के लिए एक 6-सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसमें टेक्नोक्रैट नंदन नीलेकणि अध्यक्ष होंगे। विपक्ष ने इस बीच 20 जुलाई को छात्रों पर हमले के मुद्दे को सदन में उठाने की मांग की है।
राहुल गांधी ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद स्पष्ट किया है कि उनका अगला लक्ष्य कौन होगा। उन्होंने कहा, "किसी का हाथ टूट गया, किसी का पैर। यह सब गृह मंत्री की जिम्मेदारी है।"
टीएमसी का राज्यसभा में नोटिस
टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने नियम 267 के तहत एक नोटिस प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि राज्यसभा में छात्रों पर हमले पर चर्चा की जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि छात्रों पर पेलेट गन क्यों चलाई गई। विपक्ष की योजना है कि दोनों सदनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए, जिससे हंगामे की संभावना बनी हुई है।
दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के उपयोग से इनकार किया है, जबकि सीआरपीएफ के अंतर्गत आने वाली आरएएफ ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सरकार का महत्वपूर्ण विधेयक
एंटी पेपर लीक विधेयक: सरकार आज लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक 2026 पेश करने जा रही है। यह विधेयक लोकसभा सांसद जितेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इस विधेयक में पेपर लीक के आरोपियों के लिए 50 लाख रुपये जुर्माना और 10 साल की कैद का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त, पेपर लीक के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता पर जुर्माने की राशि 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की गई है। सेवा प्रदाता को 8 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, और उसके निदेशक को 5 साल की जेल की सजा हो सकती है। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन की जाएगी और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
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