आरक्षण हटाओ आंदोलन में उमड़ी भीड़
जंतर-मंतर पर हाल ही में आरक्षण हटाने के लिए आयोजित आंदोलन में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। इस आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार बातचीत कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को हर्ष दुबे सहित कई प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। हालांकि, जब नड्डा ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, तो उन्होंने 'आंदोलन' शब्द का प्रयोग तो किया, लेकिन आरक्षण का उल्लेख नहीं किया।
इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी, stating कि नड्डा जी उस आंदोलन का नाम भी नहीं ले रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आंदोलन के बारे में क्या सोचते हैं, यह जानकारी देश को चाहिए।
जेपी नड्डा का बयान
जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा, '21 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद पूर्व निर्धारित समय के अनुसार हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक, टीम के सदस्यों के साथ सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई। आगे भी हम शीघ्र मिलेंगे।' इस पर अभिजीत दीपके ने फिर से सवाल उठाया कि नड्डा जी उस आंदोलन का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं।
दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएंगे।
उपमुख्यमंत्री का आश्वासन
इससे पहले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से विचार करेगा। उपमुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हर्ष दुबे के नेतृत्व में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगों को अगले दो दिनों में केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा।
पाठक ने कहा, 'हमें जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन से संबंधित पत्र मिला है। हमने इसे केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। किसी भी स्थिति में युवा छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।'
आंदोलन का उद्देश्य
आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे ने लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से भी मुलाकात की थी। इस दौरान छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया, 'हम मानते हैं कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कुछ छात्र मेधा सूची में ऊपर हैं और अन्य बहुत नीचे हैं, जबकि सभी के लिए पढ़ाई का स्तर समान बताया जाता है।'
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सभी छात्रों की बौद्धिक क्षमता का समान विकास सुनिश्चित करना है, ताकि सभी को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में समान अवसर मिल सकें। इसके लिए अवसरों की संख्या बढ़ाने और नए अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिससे किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो और पूरे समाज का हित सुनिश्चित हो सके।





