BJP ने गठबंधन से किया इनकार
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों वाले समूह को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से एक बड़ा झटका लगा है। भाजपा ने इस बागी गुट के साथ मिलकर कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव लड़ने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। इससे पहले, सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने यह जानकारी दी थी कि TMC का यह गुट NCPI के साथ मिलकर भाजपा के सहयोग से चुनाव में भाग लेना चाहता है।
हालांकि, भाजपा ने उनके इस बयान को खारिज कर दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस संबंध में कहा था कि BJP अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में भाजपा का कोई सहयोगी नहीं है और पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी अकेले ही चुनाव लड़ा था।
बंदोपाध्याय का बयान और BJP की प्रतिक्रिया
बंदोपाध्याय ने बुधवार को कहा था कि उनकी पार्टी NDA के हिस्से के रूप में KMC चुनाव लड़ेगी। उन्होंने पत्रकारों को बताया, "हमने BJP के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की है और उन्होंने हमारी चुनावी योजना की पुष्टि की है।" हालांकि, मजूमदार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है और केवल प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष ही इस पर टिप्पणी कर सकते हैं।
BJP के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि NCPI के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। एक BJP नेता ने 'द टेलीग्राफ' से कहा, "यदि BJP NCPI के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। इससे TMC के भ्रष्ट नेता, जिनके खिलाफ हमने वर्षों तक संघर्ष किया है, पुनः चुने जा सकते हैं।"
आगे की चुनौतियाँ
अगर BJP NCPI से KMC चुनाव में दूरी बनाती है, तो इसके दूरगामी प्रभाव सामने आ सकते हैं। दरअसल, भाजपा लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए TMC के बागी सांसदों का सहयोग चाहती है। यदि ये सांसद भाजपा से नाराज होते हैं, तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन बिल, को पारित कराने में असमर्थ हो सकती है।
हालांकि, यह भी चर्चा में है कि भाजपा इस नाराजगी को दूर करने के लिए बागी गुट को एक या दो मंत्री पद देकर संतुष्ट कर सकती है। उल्लेखनीय है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव दिसंबर 2026 तक होने की संभावना है और वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने पर काम चल रहा है। NCPI इस चुनाव में भाजपा के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक शक्ति को मजबूत करना चाहती थी, लेकिन भाजपा ने इस योजना पर ब्रेक लगा दिया है।





