पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव
पाकिस्तान और असत्य का संबंध नया नहीं है। अपनी गलतियों को छिपाने और झूठे नैरेटिव गढ़ने के लिए पाकिस्तान हमेशा से अनुचित तरीकों का सहारा लेता आया है। एक ऐसा ही मामला 1951 का है। जुलाई 1951 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली ने दुनिया में यह प्रचारित किया कि भारत पाकिस्तान पर आक्रमण की तैयारी कर रहा है।
लियाकत अली ने ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों में जाकर आरोप लगाया कि भारत ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब के निकट अपनी सेना का 90 प्रतिशत भाग तैनात किया है, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरा है। इसके साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भी दरवाजा खटखटाया।
भारत को उपदेश देने का प्रयास
लियाकत अली ने भारत के प्रधानमंत्री को एक तार भेजकर दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में हमले को टालने की अपील की। उनकी यह अपील असंगत थी, क्योंकि तार पढ़ते समय ऐसा प्रतीत होता था कि उन्हें भारतीय सेना की गतिविधियों की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के केवल तीन ब्रिगेड देश के अंदर रह गए हैं, जबकि बाकी सभी सीमा पर तैनात हैं।
इस आरोप का असली उद्देश्य क्या था, यह समझना महत्वपूर्ण है। भारत की नीति हमेशा से शांतिप्रिय रही है। उस समय के भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की पूरी कोशिश की। हालांकि, देश के एक हिस्से ने नेहरू पर पाकिस्तान के प्रति तुष्टिकरण का आरोप लगाया, फिर भी उन्होंने संबंध सुधारने की दिशा में प्रयास जारी रखे।
नेहरू का शांति का प्रस्ताव
पंडित नेहरू ने लियाकत अली के सामने युद्ध-निषेधक घोषणापत्र पेश करने का प्रस्ताव रखा था। वे चाहते थे कि दोनों देश यह संकल्प लें कि वे किसी भी स्थिति में युद्ध नहीं करेंगे और सभी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करेंगे।
हालाँकि, लियाकत अली इस तरह के संकल्प के लिए तैयार नहीं हुए और उल्टे भारत पर आरोप लगाने लगे। यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कैसे पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादों को छिपाने के लिए झूठी कहानियों का सहारा लिया।
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