सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अब्बास अंसारी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मामले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कई बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन सुनवाई के बावजूद कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया। कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट को यह निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द याचिका पर सुनवाई करे, लेकिन इसके बावजूद मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि यह उन न्यायालयों में से एक है, जिनके बारे में चिंता जताई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्पष्ट रूप से कहा कि अगर तीसरे पक्ष के अधिकार स्थापित होते हैं, तो इससे याचिकाकर्ता को अपूरणीय नुकसान हो सकता है, खासकर जब कि निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। कोर्ट ने इस स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय को मामले की शीघ्र सुनवाई करने और स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
अब्बास अंसारी ने अपनी याचिका में बताया कि उनके दादा ने 2004 में जियामऊ में एक प्लॉट खरीदी थी, और बाद में 2017 में पंजीकृत वसीयत के जरिए यह संपत्ति अब्बास और उनके भाई को दी गई थी। 2020 में, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट डालीबाग ने इस भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया। इसके बाद, 2023 में अब्बास अंसारी और उनके भाई को इस भूमि से बेदखल कर दिया गया। जब याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई, तो वहां के अधिकारियों ने भूमि के विवाद के समाधान में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अब्बास अंसारी का कहना है कि उनके भूखंड पर कब्जा करने के बाद, प्राधिकरण ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका के बावजूद कोई स्थगन आदेश पारित नहीं हुआ। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट में 2024 में उनकी विशेष अनुमति याचिका दायर की गई, जिसे शीर्ष अदालत ने गंभीरता से लिया और उच्च न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला गंभीर है, क्योंकि अगर भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहा और याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन हुआ तो इससे उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि इस मामले में कोई तीसरा पक्ष निर्माण कार्य में शामिल होता है, तो इससे याचिकाकर्ता के स्वामित्व के अधिकार पर प्रभाव पड़ेगा।
इस मामले के तहत अब्बास अंसारी ने अपनी ओर से यह भी दलील दी कि अन्य प्रभावित व्यक्तियों को राहत मिली है, लेकिन उनके मामले में कोई प्रभावी अंतरिम आदेश नहीं दिया गया। इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई होने तक निर्माण कार्य पर यथास्थिति बनाए रखें।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय को जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए और मामले पर स्थगन आदेश पर विचार करना चाहिए, ताकि याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
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