सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि चूंकि नोटिस जारी नहीं किया गया था और उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री से कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए अदालत इस बारे में कोई राय नहीं दे सकती कि याचिका को सुनवाई के लिए क्यों नहीं लिया गया। इसके बावजूद, अदालत ने यह माना कि यदि अंसारी के दावे अनुसार प्लॉट पर निर्माण कार्य जारी रहता है, तो उन्हें इससे अपूरणीय नुकसान हो सकता है। अदालत ने इस आधार पर आदेश दिया कि जब तक उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई नहीं होती, तब तक इस संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखी जाए।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिस्वर सिंह के नेतृत्व में यह फैसला सुनाया। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को जल्द से जल्द उच्च न्यायालय की उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए ताकि वहां इस पर सुनवाई हो सके। इसके साथ ही उच्च न्यायालय के रजिस्टार जनरल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की एक प्रति भेजने का निर्देश भी दिया गया, ताकि मामले की सुनवाई समय पर हो सके।
यह मामला अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी से जुड़ा है, जिन्होंने वसीयत के माध्यम से 2017 में लखनऊ स्थित जियामऊ गांव के प्लॉट नंबर 93 को अपने नाम किया था। 2020 में एसडीएम लखनऊ ने इसे निष्क्रिय संपत्ति घोषित कर दिया, जिससे अंसारी बंधुओं को बेदखल कर दिया गया।
इसके बाद, अंसारी बंधुओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन जब वहां से राहत नहीं मिली, तो उन्होंने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में उच्च न्यायालय से इस मामले की सुनवाई शीघ्र करने का आदेश दिया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश होकर कहा कि उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अंसारी के मामले पर प्रभावी सुनवाई नहीं की, और अधिकारियों ने इस प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सिर्फ अंसारी को ही उनकी पृष्ठभूमि के कारण राहत से वंचित रखा गया, जबकि अन्य लोगों को राहत मिल रही थी।
इस मामले में अब्बास अंसारी के परिवार का कहना है कि यह संपत्ति उनके दादा द्वारा 2004 में खरीदी गई थी, और 2017 में यह वसीयत के माध्यम से उन्हें सौंप दी गई थी। इसके बावजूद, 2020 में एसडीएम ने एक पक्षीय आदेश पारित कर इस संपत्ति को निष्क्रिय संपत्ति घोषित कर दिया, और अगस्त 2023 में अंसारी बंधुओं को बेदखल कर दिया गया।
अंसारी ने यह आरोप भी लगाया कि जब उन्होंने इस मामले को उच्च न्यायालय में उठाया, तो उनकी याचिका को बार-बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद, वे सुप्रीम कोर्ट गए और यहां से राहत मिली। अब, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई शीघ्र की जाए और अंसारी को कोई अस्थायी राहत दी जाए।
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