पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने 2 नवंबर 2026 को अपनी ‘प्रेस फ्रीडम प्रीडेटर्स’ सूची जारी की। इसमें 33 नेताओं, कंपनियों और संगठनों के नाम शामिल हैं। भारत से अडाणी ग्रुप और ऑपइंडिया को लगातार दूसरे साल इस सूची में जगह मिली है। सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी पहली बार शामिल किया गया है।
क्या है ‘प्रेस फ्रीडम प्रीडेटर्स’ सूची?
यह सूची उन लोगों, कंपनियों और संगठनों की पहचान करती है, जिन्हें RSF पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए खतरा मानता है। इसमें राजनीतिक, सुरक्षा, कानूनी, आर्थिक और सामाजिक श्रेणियों के तहत नाम शामिल किए जाते हैं।
अडाणी ग्रुप पर पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आरोप
अडाणी ग्रुप को कानूनी श्रेणी में रखा गया है। संगठन के मुताबिक, ग्रुप और उसकी कंपनियों ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि समेत कई कानूनी मामले दर्ज कराए हैं। रिपोर्ट में 2017 से अब तक 15 से अधिक पत्रकारों और मीडिया संगठनों के खिलाफ करीब 10 कानूनी कार्रवाइयों का जिक्र है। इसमें पत्रकार रवि नायर का मामला भी शामिल है। सितंबर 2026 में अडाणी ग्रुप की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। करीब एक सप्ताह बाद जमानत पर रिहा किया गया। संगठन का कहना है कि अडाणी ग्रुप से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर 11 दीवानी और आपराधिक मामले अब भी लंबित हैं। हालांकि, किसी मीडिया संस्थान या पत्रकार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज होना अपने आप में प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन साबित नहीं करता।
ऑपइंडिया पर ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देने का आरोप
ऑपइंडिया को सामाजिक श्रेणी में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वेबसाइट के कुछ लेख स्वतंत्र पत्रकारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं और उनके खिलाफ ऑनलाइन ट्रोलिंग को बढ़ावा दे सकते हैं। इसका उदाहरण नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग का दिया गया है। उन्होंने मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना की थी। इसके बाद ऑपइंडिया ने उन पर कई लेख प्रकाशित किए। इनमें से एक में उन्हें ‘चीनी प्रोपेगेंडा एजेंट’ बताया गया था। संगठन के अनुसार, इस तरह की सामग्री पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा दे सकती है।
दुनिया के दूसरे बड़े नाम भी सूची में शामिल
2026 की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहली बार शामिल हुए हैं। इनके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जावियर मिलेई भी शामिल हैं। वहीं, एलन मस्क, Meta और Alphabet जैसी बड़ी टेक कंपनियों को भी जगह दी गई है। RSF ने इन नामों को राजनीतिक, कानूनी, आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा जैसी अलग-अलग श्रेणियों में रखा है।
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग
प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 2026 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में उसकी रैंकिंग 151 थी। यह इंडेक्स देशों में प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति बताता है, जबकि ‘प्रीडेटर्स’ सूची में उन लोगों और संस्थाओं के नाम होते हैं जिन्हें संगठन पत्रकारिता के लिए खतरा मानता है।
अडाणी ग्रुप और ऑपइंडिया का लगातार दूसरे साल इस सूची में शामिल होना भारत में मीडिया की स्वतंत्रता, कॉरपोरेट ताकत और पत्रकारों के खिलाफ कानूनी व ऑनलाइन दबाव को लेकर एक बार फिर बहस खड़ी करता है।





