मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा इन विज्ञापनों की जांच की गई, जिसके बाद 350 विज्ञापनों को स्वीकृति मिल गई, जबकि 166 विज्ञापनों को मानकों के अनुरूप न होने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन प्रसारित करने की अनुमति लेने के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) सबसे आगे रही है। भाजपा ने 49 आवेदन भेजे थे और कुल 293 विज्ञापनों की अनुमति मांगी थी। इन विज्ञापनों को जांचने के बाद 207 विज्ञापनों को स्वीकृति दी गई, जबकि 86 विज्ञापनों को अस्वीकृत कर दिया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने 28 आवेदन भेजे थे और 200 विज्ञापनों को प्रसारित करने की अनुमति मांगी थी, जिनमें से 121 विज्ञापनों को स्वीकृति मिली।
कांग्रेस ने 9 आवेदन भेजे थे और 24 विज्ञापनों को मंजूरी की मांग की थी, जिनमें से 22 विज्ञापनों को मंजूरी मिल गई, और दो विज्ञापन अस्वीकृत किए गए।
दिल्ली में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या अब जनसंख्या से भी ज्यादा हो गई है, यानी लगभग 5 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं, और औसतन हर व्यक्ति के पास दो मोबाइल कनेक्शन होते हैं। इस स्थिति को देखते हुए सोशल मीडिया पर प्रचार करना बहुत आसान हो गया है, क्योंकि यह माध्यम अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का एक प्रभावी और सस्ता तरीका बन गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार करने के लिए कुछ खास नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है।
इन विज्ञापनों में किसी भी प्रकार से सेना की वर्दी या प्रतीक चिह्न का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, राष्ट्रपति से संबंधित किसी बयान को भी नहीं दिया जा सकता और ऐसे चित्र या बयान जो देश की अखंडता को प्रभावित करें, उन्हें भी विज्ञापनों में जगह नहीं दी जा सकती। जिन विज्ञापनों में इन मानकों का उल्लंघन होता है, उन्हें स्वीकृति नहीं मिलती है।
2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक दलों ने सोशल मीडिया पर भारी मात्रा में खर्च किया था। उस समय के आंकड़ों के अनुसार, फेसबुक पर चुनाव प्रचार के लिए 1.99 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
भाजपा ने फेसबुक पर 31.61 लाख रुपये, कांग्रेस ने 13.67 लाख रुपये और माई दिल्ली-माई प्राइड पेज ने 14.73 लाख रुपये खर्च किए थे। "आप" समर्थित पेज पर 11.92 लाख रुपये खर्च किए गए थे। चुनाव प्रचार के अंतिम सप्ताह में फेसबुक पर 78 लाख रुपये खर्च किए गए थे, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी प्रचार के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
अब, इस बार चुनावी प्रचार के आखिरी सप्ताह में और भी ज्यादा सोशल मीडिया प्रचार देखने की संभावना है, क्योंकि राजनीतिक दल जान चुके हैं कि सोशल मीडिया चुनाव प्रचार के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुका है, और इस बार वे इसे पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करेंगे।
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