संदीप दीक्षित का कटाक्ष
नई दिल्ली विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने एसपी और टीएमसी के समर्थन पर तंज कसते हुए कहा,
"इंडिया ब्लॉक लोकसभा चुनाव के लिए बना था, विधानसभा चुनाव से इसका कोई लेना-देना नहीं है। दिल्ली में एसपी और टीएमसी का उतना ही प्रभाव है, जितना मेरा ऑस्ट्रेलिया के चुनाव में होगा। उनके ऐलान से दिल्ली की राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ता।"
उन्होंने आगे कहा कि यह खयाली पुलाव बनाने जैसा है और बड़े नेता भी इस तरह के दावे कर सकते हैं।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेता प्रवीण खंडेलवाल ने एसपी और टीएमसी के समर्थन को लेकर अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा,
"चोर-चोर मौसेरे भाई होते हैं। टीएमसी और एसपी बंगाल और यूपी में जो कर रही हैं, वही केजरीवाल दिल्ली में कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या दिल्ली की जनता इस गठजोड़ को स्वीकार करेगी?"
खंडेलवाल ने दावा किया कि दिल्ली की जनता समझदार है और इस बार बीजेपी को सत्ता में लाने का पूरा मन बना चुकी है।
गहलोत और अनवर का बयान
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा। उन्होंने कहा,
"केजरीवाल चुनावी मैदान में अपने समीकरण खुद बनाते हैं। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि कांग्रेस और बीजेपी एक साथ हैं, लेकिन जनता जानती है कि ऐसा संभव नहीं है।"
कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने इसे हर पार्टी का स्वतंत्र फैसला बताते हुए कहा,
"किसी भी दल को यह तय करने का अधिकार है कि उसे किसे समर्थन देना है। दिल्ली के राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखकर ही ऐसे फैसले लिए जाते हैं।"
क्या कहना है जनता का?
राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी के इस दौर में सवाल यह है कि क्या दिल्ली की जनता इस तरह की राजनीति से प्रभावित होगी, या वह विकास और स्थानीय मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएगी।
दिल्ली चुनाव न केवल इंडिया ब्लॉक के भीतर समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम संदेश देगा। अब देखना होगा कि चुनावी नतीजों में किसका दावा सही साबित होता है।





